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रायपुर में इंटरनेशनल कॉल सेंटर स्कैम का पर्दाफाश: 42 गिरफ्तार

Manmahesh

साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच ने एक साथ तीन अवैध कॉल सेंटरों पर छापा मारकर 42 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह पर करीब 50 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है।

एक साल से चल रहा था ठगी का खेल

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले एक साल से रायपुर से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था। इस दौरान उन्होंने विदेशों, खासकर अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाया और उन्हें धोखा देकर बड़ी रकम ठग ली।

अहमदाबाद और चीन से जुड़ा नेटवर्क

इस साइबर गिरोह का मास्टरमाइंड अहमदाबाद का निवासी बताया जा रहा है। वहीं तकनीकी संचालन चीन में बैठे नेटवर्क के जरिए किया जा रहा था। इससे यह साफ होता है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का संगठित अपराध था।

सात राज्यों के युवक शामिल

इस गिरोह में देश के सात राज्यों—गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मेघालय, हरियाणा और पंजाब के युवक शामिल थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि गिरोह ने अलग-अलग राज्यों से लोगों को जोड़कर एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था।

करोड़ों की ठगी और बरामदगी

क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई के दौरान आरोपितों से 67 मोबाइल फोन, 18 लैपटॉप और 28 कंप्यूटर जब्त किए हैं। इन उपकरणों के जरिए ही साइबर ठगी को अंजाम दिया जा रहा था।

ऐसे चलता था साइबर फ्रॉड का खेल

यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था और ठगी की पूरी प्रक्रिया को पांच चरणों में अंजाम देता था। हर चरण में अलग-अलग टीम काम करती थी, जिससे पीड़ित को धोखा देना आसान हो जाता था।

पहला चरण: डेटा जुटाना

सबसे पहले गिरोह व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिका के लोन आवेदकों का डेटा जुटाता था। इसके बाद उन्हें इंटरनेट कॉल के जरिए संपर्क किया जाता था।

दूसरा चरण: भरोसा जीतना

इसके बाद डिपॉजिट ग्रुप पीड़ित को यह बताता था कि उसका सिबिल स्कोर खराब है और उसे सुधारने के लिए कुछ प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इस बहाने बैंक से जुड़ी जानकारी हासिल की जाती थी।

तीसरा चरण: तकनीकी चाल

टेक्निकल ग्रुप पीड़ित के खाते में छोटी रकम दिखाकर यह विश्वास दिलाता था कि प्रक्रिया सही है। इसमें बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था और विदेशी नेटवर्क की भूमिका सामने आई।

चौथा चरण: मनोवैज्ञानिक दबाव

फिर कॉलिंग ग्रुप दोबारा सक्रिय होता था और पीड़ित को समझाता था कि खाते में आई रकम टेस्ट ट्रांजेक्शन है, जिसे वापस करना होगा। इससे पीड़ित पूरी तरह भरोसे में आ जाता था।

पांचवां चरण: गिफ्ट कार्ड के जरिए ठगी

अंतिम चरण में पीड़ित से एप्पल, गूगल या अमेजन के गिफ्ट कार्ड खरीदवाए जाते थे। उनके कोड के जरिए रकम को कैश में बदला जाता और हवाला के माध्यम से मास्टरमाइंड तक पहुंचा दिया जाता था।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

क्राइम ब्रांच की इस बड़ी कार्रवाई से साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस अब इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय लिंक और अन्य जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है।

साइबर अपराध से सावधान रहने की जरूरत

यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करने की जरूरत है।

निष्कर्ष

रायपुर में सामने आया यह इंटरनेशनल कॉल सेंटर स्कैम साइबर अपराध के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है। पुलिस की सक्रियता से इस बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए लगातार निगरानी और जागरूकता बेहद जरूरी है।