नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की दरें दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं, जिससे घरेलू विमान सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों को भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। खासकर इंडिगो एयरलाइंस ने इस कड़ी महंगाई के बीच लंबी दूरी की उड़ानों पर 10,000 रुपये के अतिरिक्त ईंधन सुविधा शुल्क (फ्यूल सरचार्ज) लगाने की घोषणा की है।
एटीएफ की यह अचानक वृद्धि वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते हुई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोलियम विपणन कंपनियां (ओएमसी) अभी भी इस वृद्धि के नुकसान को अपनी तरफ से सहन कर रही हैं और उपभोक्ताओं से उस बढ़ोतरी को तत्काल वसूल नहीं किया जा रहा है।
एटीएफ की बढ़ी हुई दरों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमानन उद्योग दोनों को प्रभावित किया है। इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइन ने अपनी लंबी दूरी की उड़ानों के लिए ईंधन वाले अतिरिक्त शुल्क में वृद्धि की है, जिससे यात्रियों की जेब पर प्रभाव पड़ेगा। लंबी दूरी की उड़ानों की बुकिंग करने वाले यात्री अब अधिक खर्च का सामना करेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि के कारण विमानन ईंधन की लागत भी बढ़ती है, जो अंततः एयरलाइनों की परिचालन लागत में इजाफा करती है। इंडिगो और अन्य एयरलाइन कंपनियों को इस बढ़ी हुई लागत को संभालने के लिए कई बार यात्रा भाड़े और अतिरिक्त शुल्क बढ़ाने पड़ते हैं।
भारत सरकार ने इस विषय पर कहा है कि ओएमसी लगातार कीमतों में परिवर्तनों के बावजूद घाटा झेल रही हैं ताकि आयातित कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत का भार उपभोक्ताओं पर कम पड़े। सरकार की यह रणनीति फिलहाल उपभोक्ताओं को कुछ राहत देती है, लेकिन यह मॉडल लंबी अवधि तक टिकाऊ होगा या नहीं, यह वक्त बताएगा।
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें ऐसी ही बनी रहती हैं, तो एयरलाइनों को और अधिक खर्च कटौती या अन्य विकल्प ढूंढ़ने पड़ सकते हैं, जिससे अंततः टिकट की कीमतों में वृद्धि होना तय है।
इस स्थिति में यात्रियों के लिए भरपाई की व्यवस्था करनी आवश्यक हो गई है ताकि महंगे ईंधन शुल्क से उड़ान सेवा प्रभावित न हो और विमानन क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। उपभोक्ताओं को भी अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इन अतिरिक्त शुल्कों को ध्यान में रखना होगा।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ की दोगुनी दरों के कारण विमानन उद्योग में आवागमन महंगा होने लगा है। इंडिगो के अतिरिक्त 10,000 रुपये के फ्यूल सरचार्ज ने इस समस्या को और गहरा कर दिया है, जबकि केंद्र सरकार ने ओएमसी द्वारा अपने घाटे को सीधे उपभोक्ताओं पर डाले बिना सम्हालने की कोशिश जारी रखी है।
अगले कुछ महीनों में वैश्विक तेल की कीमतों और घरेलू नीतियों के आधार पर विमानन उद्योग की स्थिति में स्पष्ट बदलाव आ सकता है, जिसके लिए सभी हितधारकों को सतत निगरानी रखनी होगी।











