23 नवंबर से गिरिपार क्षेत्र में शुरू हो जाएगा बूढी दिवाली का पर्व

23 नवंबर से गिरिपार क्षेत्र में शुरू हो जाएगा बूढी दिवाली का पर्व

23 नवंबर से गिरिपार क्षेत्र में शुरू हो जाएगा बूढी दिवाली का पर्व

डलहौज़ी हलचल (नाहन) विजय आजाद : पारम्परिक संस्कृति के धनी जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय के लोगों ने बुढ़ी दिवाली की तैयारियां  लगभग पूरी कर ली है। 23 नवंबर से क्षेत्र की अधिकतर पंचायतों में मशाल यात्रा से बुढी दिवाली पर्व का आग़ाज हो जायेगा ।

बता दें की नई दिवाली के ठीक एक महीने बाद पूरे गिरिपार क्षेत्र मे मनाये जाने वाले इस अहम पर्व की तैयारियां क्षेत्र के लोगों ने पूरी कर ली है । गृहणियों ने इस पर्व पर परोसे जाने वाले मुख्य व्यंजन मुड़ा व शाकुली बनाने का कार्य पूरा कर लिया है। ग्रामीण क्षेत्र में 23 और 24 अक्तूबर को दीपावली का त्यौहार भी बड़े धूमधाम से मनाया गया। परंतु गिरिपार के करीब 3 लाख हाटी समुदाय के लोग अब 23 नवंबर से बूढ़ी दीवाली मनाने जा रहे है। बूढ़ी दीवाली का यह त्यौहार सिरमौर जिले के नोहराधार क्षेत्र के भराड़ी, चौकर व चाड़ना मे और गिरिपार के  शिलाई, रोनहाट व संगड़ाह क्षेत्र के अलावा उतराखंड के जौंसार बाबर में भी मनाया जाता है।  बूढ़ी दीवाली के इस त्यौहार को परंपरागत तरीके से मनाने के लिए क्षेत्र के ग्रामीण कई दिन पहले से ही तैयारी में जुट जाते है।

इन दिनों ग्रामीण अपने घरों में लिपाई और पुताई करने में जुटे हुए हैं । बूढ़ी दीवाली का पांरपरिक व्यंजन मुड़ा है जो कि गेंहू को उबालकर सुखाने के बाद कड़ाही में भूनकर तैयार किया जाता है । इस मूड़े के साथ अखरोट की गीरी, खील, बताशे व मुरमुरे आदि मिलाए जाते है। बूढ़ी दीवाली के दिन लोग सुबह उठकर अंधेरे में घास व लकड़ी की मशालें जलाकर एक जगह पर एकत्रित हो जाते है और अंधेरे में ही माला नृत्य गीत व संगीत का कार्यक्रम शुरू हो जाता है।