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कान की मशीन मिलने के 9 वर्ष बाद सुनाई दिया
कान की मशीन मिलने के 9 वर्ष बाद सुनाई दिया
 

डलहौज़ी हलचल (कुल्लू)  : गीता जो की 12 वर्षीय है। गीता देवी अपने परिवार के साथ नग्गर से काफी उप्पर जा कर किसी के बगीचे मे रहते है जहाँ पर गीता के पिता उस बगीचे की देख भाल करते है। गीता के परिवार मे गीता के पिता (लोकेश खतरी) माता तथा एक छोटा भाई है। लोकेश खतरी की परिवार की आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी ठीक नही है। गीता जब 3 वर्ष की थी तब से गीता को कान में सुन्नई देना बंद हो गया था । जैसे- जैसे गीता की उम्र बढ़ रही है वैसे - वैसे गीता को काफी समस्याओ का सामना करना पढ़ रहा है ।गीता के पिता लोकेश ने कई बार बेटी गीता का इलाज़ करवाने के बारे मे सोचा परन्तु घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इलाज़ नही करवा सके।

गीता कुल्लू

गाँव किसी सज्जन ने लोकेश को कार सेवा दल संस्था के बारे मे जानकारी दी। जानकारी मिलते ही गीता की माता गीता को ले करके संस्था के कार्यलय आ गई और संस्था के अधिकारियों से मिली ।गीता की माता ने संस्था के अधिकारियों से सारी बातें सांझ की अधिकारियों द्वारा गीता की माता सारी बात ध्यान से सुननी गई। अधिकारिओं द्वारा कागज़ी करवाई करने के बाद गीता को चेक उप के लिए हॉस्पिटल भेजा गया। हॉस्पिटल मे गीता का चेक उप करने के पश्चात डॉक्टर द्वारा कान मे मशीन लगाने की सलाह दी गई। पैसों के अभाव की समस्या खड़ी हो गई तभी गीता की माता गीता को ले करके सस्था के हेल्प डेस्क काउंटर नंबर 124 मे आई वहां पर मौजूद संस्था के सेवादारों को पैसों की समस्या के बारे में बताया सेवादारों द्वारा संस्था के अध्यक्ष मनदीप सिंह से पुरी बात साँझा की गई। उसके बाद गीता को कान की मशीन खरीद कर दी गई गीता 9 वर्ष बाद फिर से सुन्न पा रही थी जिसकी वजहा से गीता और उसकी माता काफी खुश नज़र आ रही थी। कान की समस्या के कारण गीता ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी संस्था द्वारा गीता को पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया गया और जरूरत पड़ने पर उन्हें पाठ्य सामग्री और अन्य सहायता भी की जाएगी