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लाहौल-स्पीति जिले के लिए चालू वित्त वर्ष की वार्षिक ऋण योजना 106 करोड़ रुपये की-उपायुक्त
किसानों की आर्थिक समृद्धि को अतिरिक्त सुदृढ़ता देने के लिए लघु कोल्ड स्टोर के निर्माण की बनाएं योजना 
 
डलहौज़ी हलचल (केलांग) : उपायुक्त कार्यालय सभागार में आज चालू वित्त वर्ष की वार्षिक ऋण योजना की पहली तिमाही की समीक्षा को  लेकर जिला स्तरीय सलाहकार एवं समीक्षा समिति की बैठक का आयोजन हुआ। अग्रणी जिला बैंक के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त लाहौल- स्पीति एवं समिति के अध्यक्ष नीरज कुमार ने की।

उन्होंने कहा कि लाहौल-स्पीति जिले के लिए चालू वित्त वर्ष की वार्षिक ऋण योजना 106 करोड़ रुपये की है। कृषि क्षेत्र के लिए ही 77.86 करोड़ की राशि तय की गई है। जबकि विभिन्न उद्यम स्थापित करने के लिए 10 करोड़ 88 लाख की राशि के ऋण आवंटन का लक्ष्य रखा गया है। अन्य प्राथमिकता क्षेत्र में  भी बैंकों द्वारा 8 करोड़ 25 लाख  के ऋण दिए जाएंगे।

उपायुक्त ने इस मौके पर सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न योजनाओं और स्कीमों के तहत विभागों द्वारा बैंकों के लिए भेजे गए ऋण आवेदनों की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने बताया कि इस योजना के तहत चालू वित्त वर्ष के लिए 60 मामलों को स्वीकृति प्रदान करने का लक्ष्य था। जिसके मुकाबले 42 मामलों में लाभार्थियों को ऋण सुविधा दी जा चुकी है। उन्होंने लंबित 18 मामलों को लेकर कहा कि उद्योग विभाग और विभिन्न बैंक परस्पर समन्वय स्थापित करके अविलंब इन मामलों को भी स्वीकृत करके लाभार्थियों को वित्तीय मदद  सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि योजना के तहत ऋण मामले का आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संबंधित बैंक को भेजा जाता है। इस आवेदन की जांच करके बैंक को 7 दिनों के भीतर इस पर अपना निर्णय लेना होता है। यदि बैंक 7 दिन के भीतर इस पर कोई कार्यवाही नहीं करेगा तो आठवें दिन यह आवेदन स्वतः स्वीकृति के रूप में विभाग को वापिस स्थानांतरित हो जाता है। उन्होंने कहा कि संबंधित बैंक अधिकारी ऑनलाइन प्राप्त इन आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करें।

उपायुक्त ने कहा कि जिले में प्रति व्यक्ति आय अन्य क्षेत्रों की तुलना में पहले से ही अधिक है। ऐसे में किसानों की आय को दोगुना करने के लिए विशेष कार्य योजना के तहत कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिए मौजूदा समय में

अपनाए जा रहे खेती के पैटर्न को कुछ हद तक बदलने को लेकर भी संबंधित विभागों द्वारा कार्य किया जाना चाहिए। इसमें कृषि विशेषज्ञों की सलाह भी ली जाए ताकि

किसानों द्वारा अर्जित की जा रही आय को और बढ़ाने के विकल्प मिल जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि पुष्प उत्पादन के बजाय यदि किसान टिशू कल्चर के माध्यम से कन्द (बल्ब) उत्पादन की ओर भी अपना रुझान बढ़ाएं तो उन्हें और बेहतर आमदनी हासिल हो सकती है। उपायुक्त ने क्षेत्र में मधुमक्खी पालन और खुम्ब उत्पादन में भी किसानों को जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन और खुम्ब उत्पादन उन किसानों के लिए आमदनी का बढ़िया जरिया हो सकता है जिनके पास कृषि योग्य भूमि नहीं है। इन योजनाओं में करीब 80 फ़ीसदी तक अनुदान भी दिया जाता है।

उपायुक्त ने किसानों की आर्थिक समृद्धि को अतिरिक्त सुदृढ़ता देने के लिए लघु कोल्ड स्टोर के निर्माण करने के भी निर्देश दिए ताकि इनका व्यापक लाभ किसानों को मिल सके और उन्हें अपने उत्पादों के और ज्यादा दाम मिलना सुनिश्चित हो सकें।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बागवानी विभाग मधुमक्खी पालन को व्यवसाय बनाने के लिए किसानों का एक समूह तैयार करेगा। इन्हें कुल्लू जिला में संचालित डाबर की शहद उत्पादन इकाई का भ्रमण भी करवाया जाएगा ताकि वे इस व्यवसाय से जुड़ने के लाभ को जान सकें। 

उपायुक्त ने कहा कि लाहौल घाटी के टिन्गरेट और चिमरट क्षेत्र के वे गांवों जो अभी तक बैंकिंग सेवाओं से पूरी तरह से नहीं जुड़े हैं, उनके लिए बैंक सेवाएं उपलब्ध करने की दिशा में भी विशेष प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने बैठक में मौजूद भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी को कहा कि यदि मौजूदा मानकों में बदलाव  किए जाने की जरुरत है तो इस मुद्दे को राज्य स्तरीय बैंकिंग समिति में भी रखा जाए ताकि इस पर कोई निर्णय हो और इस दुर्गम क्षेत्र के ग्रामीणों को बैंकिंग योजनाओं का लाभ निरंतर मिल सके।

उपायुक्त ने कहा कि हालांकि ऋण- जमा अनुपात में पिछ्ले वर्ष की तुलना में 0.09 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और अब ये पहली तिमाही के अन्त तक 19.50 फीसदी था। लेकिन फिर भी बैंकों को चालू वित्त वर्ष के दौरान इसे और बढ़ाने को लेकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और मुद्रा योजना के तहत भी अधिकाधिक लोगों को जोड़ने की बात कही। बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक नोरबू छेरिंग के अलावा समिति से जुड़े अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।