डलहौज़ी हलचल (बनीखेत): मंगलवार को पठानकोट-चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बनीखेत बस स्टैंड पर बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब स्थानीय टैक्सी चालकों ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चक्का जाम कर दिया। चालकों का आरोप है कि क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से दोपहिया वाहन किराए पर दिए जा रहे हैं, जिससे उनका व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो रहा है।
अवैध बाइक रेंटल संचालकों पर गंभीर आरोप
टैक्सी चालकों का मुख्य विरोध उन संचालकों के खिलाफ है जो बिना किसी कानूनी औपचारिकता के पर्यटकों को स्कूटी और बाइक किराए (Rent) पर दे रहे हैं। नियमानुसार, ‘रेंट-ए-मोटरसाइकिल स्कीम’ के तहत संचालकों के पास निम्नलिखित सुविधाएं अनिवार्य हैं:
- आरटीओ से आधिकारिक पंजीकरण और रेंटल एग्रीमेंट।
- स्वयं की वर्कशॉप और सर्विस स्टेशन।
- अनुभवी मैकेनिक और पार्किंग व पिकअप पॉइंट।
चालकों का दावा है कि डल्हौजी और बनीखेत क्षेत्र में अधिकतर रेंटल संचालकों के पास ये मूलभूत दस्तावेज और सुविधाएं नहीं हैं। लाखों रुपये का बैंक लोन लेकर टैक्सी चलाने वाले इन चालकों का कहना है कि प्रशासन को कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा।
हाईवे पर लगा जाम, यात्री हुए परेशान
सुबह करीब 11:15 बजे शुरू हुए इस चक्का जाम के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के पहिए थम गए। सड़क के दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासनिक हस्तक्षेप: एसडीएम और डीएसपी ने संभाला मोर्चा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम डल्हौजी अनिल भारद्वाज और डीएसपी डल्हौजी मयंक शर्मा तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने उत्तेजित चालकों से बात की और उन्हें पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह में विस्तृत चर्चा के लिए बुलाया।
प्रशासन का आश्वासन:
“प्रशासन टैक्सी चालकों की समस्याओं के प्रति गंभीर है। अवैध रूप से चल रहे बाइक रेंटल कारोबार की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”
— प्रशासनिक अधिकारी।
अधिकारियों के ठोस भरोसे के बाद, दोपहर करीब 12:15 बजे टैक्सी चालकों ने जाम हटा दिया और यातायात सुचारू रूप से बहाल हो सका।
आगामी कार्रवाई पर टिकी नजरें
टैक्सी यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध रेंटल कारोबार पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि आरटीओ और पुलिस प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं।











