AIMIM ने त्रिणमूल के ‘स्टिंग’ के बाद हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ा

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बंगाल में त्रिणमूल कांग्रेस के खिलाफ सामने आए ‘स्टिंग’ मामले के बाद हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर दिया है। यह फैसला चुनावों से ठीक पहले उठाया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष […]

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बंगाल में त्रिणमूल कांग्रेस के खिलाफ सामने आए ‘स्टिंग’ मामले के बाद हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर दिया है। यह फैसला चुनावों से ठीक पहले उठाया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।

AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी अब बंगाल में अपनी अलग चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि बंगाल में संयुक्त अभियान के तहत हुमायूं कबीर के साथ जो कार्यक्रम तय था, वह भी रद्द कर दिया गया है। यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण मतदाताओं से मिलकर चुनावी समर्थन जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किया जाना था।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब त्रिणमूल कांग्रेस के खिलाफ एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ मीडिया में आया, जिसमें पार्टी के कुछ नेताओं के कथित अनुशासनहीन तत्व उजागर हुए। AIMIM ने इस मामले में त्रिणमूल के रवैए को लेकर असंतोष व्यक्त किया और गठबंधन तोड़ने का निर्णय लिया।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि AIMIM का यह कदम बंगाल में चुनावी परिदृश्य को और जटिल बना सकता है। ओवैसी की पार्टी पिछले कुछ वर्षों में बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, और गठबंधन के खत्म होने से क्षेत्रीय दलों के साथ समीकरणों में बदलाव आने के आसार हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, AIMIM अब बंगाल के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को और प्रभावी बनाने के लिए स्वतंत्र अभियान चलाएगी। इस निर्णय से कैम्पेनिंग की रणनीति में बड़े बदलाव आएंगे, जो आगामी चुनाव नतीजों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

त्रिणमूल कांग्रेस ने फिलहाल इस मसले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी स्थिति को संभालने और संभावित नुकसान को कम करने के लिए रणनीति तैयार कर रही है।

चुनाव परिणामों से पहले यह गठबंधन टूटना राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, जबकि मतदाता भी इन घटनाओं को ध्यान से देख रहे हैं। ओवैसी के इस कदम से बंगाल के चुनावी समीकरण कितने बदलते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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