अब रिश्तेदारों से भी ऐसे नहीं ले सकेंगे बच्चा गोद! सरकार ने बदले नियम, जानिए पूरी प्रक्रिया
डलहौज़ी हलचल | शिमला
अब यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार, रिश्तेदारी या सौतेले माता-पिता के रूप में किसी बच्चे को कानूनी तौर पर गोद लेना चाहता है, तो उसे केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। सभी निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही जिला दंडाधिकारी द्वारा दत्तक ग्रहण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि नए नियमों के तहत परिवार और रिश्तेदारी में भी दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया CARA के माध्यम से ही पूरी होगी। इसके लिए किसी प्रकार का पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा।
25 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को मिल चुका है नया परिवार
उपायुक्त ने बताया कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से 20 दिसंबर 2022 से 1 सितंबर 2025 तक 25 ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को कानूनी प्रक्रिया के तहत दत्तक ग्रहण करवाया जा चुका है। उन्होंने समाज के सक्षम एवं समृद्ध परिवारों से शिशु गृह और आश्रमों में रह रहे बच्चों को अपनाने की अपील की, ताकि उन्हें सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सके।
रिश्तेदारी में गोद लेने पर भी अब होगी कानूनी प्रक्रिया
उपायुक्त ने कहा कि पहले कई लोग परिवार या रिश्तेदारी में बच्चों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के गोद ले लेते थे, जिससे भविष्य में उत्तराधिकार, पहचान और अन्य कानूनी मामलों में समस्याएं उत्पन्न होती थीं। अब CARA के माध्यम से पूरी प्रक्रिया पूरी होने पर दत्तक माता-पिता को पूर्ण कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चा 5 वर्ष या उससे अधिक आयु का है तो उसकी सहमति भी अनिवार्य रूप से ली जाएगी।
सौतेले माता-पिता भी कर सकते हैं कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण
सौतेले माता या पिता (Step Parent) भी अब निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बच्चे को गोद ले सकते हैं। इसके लिए आवश्यक परिस्थितियों में जैविक माता-पिता की सहमति, दस्तावेजों का सत्यापन तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे को दत्तक माता-पिता की वैध संतान के समान सभी अधिकार प्राप्त होंगे।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताई चयन प्रक्रिया
जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल ने बताया कि बच्चा गोद लेने के लिए आवेदन करने वाले अभिभावकों का चयन निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर किया जाता है। पात्र अभ्यर्थियों को मेरिट के अनुसार दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
कौन ले सकता है बच्चा गोद?
जिला बाल संरक्षण अधिकारी इंदु शर्मा के अनुसार—
- भारतीय नागरिक, एनआरआई एवं विदेशी नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।
- विवाहित दंपति, एकल महिला तथा निर्धारित शर्तों के अनुसार एकल अभिभावक भी बच्चा गोद ले सकते हैं।
- विवाहित दंपति की शादी कम से कम दो वर्ष पुरानी होनी चाहिए।
- माता-पिता और बच्चे की आयु में कम से कम 25 वर्ष का अंतर होना आवश्यक है।
- दंपति दोनों की सहमति अनिवार्य है।
- दत्तक ग्रहण करने वाले अभिभावकों की आर्थिक स्थिति स्थिर होनी चाहिए।
- एकल महिला लड़का या लड़की दोनों को गोद ले सकती है, जबकि एकल पुरुष केवल लड़के को ही गोद ले सकता है।
ये दस्तावेज होंगे आवश्यक
दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के लिए निम्न दस्तावेज आवश्यक हैं—
- हालिया पारिवारिक फोटो
- पैन कार्ड
- जन्म प्रमाण पत्र या आयु प्रमाण
- आधार कार्ड/वोटर आईडी/पासपोर्ट/बिजली या टेलीफोन बिल
- आयकर रिटर्न की प्रमाणित प्रति
- सरकारी चिकित्सक द्वारा जारी मेडिकल प्रमाणपत्र
- विवाह प्रमाणपत्र (यदि विवाहित हों)
- तलाक प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
- दो संदर्भ (रेफरेंस) व्यक्तियों के बयान
- यदि परिवार में पाँच वर्ष से अधिक आयु का बच्चा है तो उसकी सहमति
CARA की निगरानी में होती है पूरी प्रक्रिया
भारत में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत पूरी की जाती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है। हिमाचल प्रदेश में अधिकृत स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के माध्यम से ही बच्चों का विधिक दत्तक ग्रहण कराया जाता है।
महत्वपूर्ण बात
यदि आप रिश्तेदारी में या सौतेले माता-पिता के रूप में किसी बच्चे को गोद लेने की योजना बना रहे हैं, तो पहले CARA पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण अवश्य कराएं। बिना कानूनी प्रक्रिया के किया गया दत्तक ग्रहण भविष्य में कई कानूनी जटिलताओं का कारण बन सकता है।
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