पिता की 27 साल की मेहनत लाई रंग, चुराह की बेटी शशिवाला ने बिना कोचिंग पास की NEET परीक्षा
डलहौज़ी हलचल | चंबा
कहते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की जाए तो सफलता की राह बन ही जाती है। इसे सच साबित किया है जिला चंबा के उपमंडल चुराह की ग्राम पंचायत पंझेई के गांव चला की होनहार बेटी शशिवाला शर्मा ने। शशिवाला ने अपने दूसरे प्रयास में NEET परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपने माता-पिता के सपने को नई उड़ान दी है, बल्कि हिमगिरी और चुराह क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया है।
शशिवाला ने NEET परीक्षा में 550 अंक हासिल किए हैं। उनकी इस उपलब्धि के बाद परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है तथा लोग उन्हें और उनके माता-पिता को बधाई दे रहे हैं।
बिना कोचिंग की तैयारी, पहले प्रयास की असफलता को बनाया ताकत
शशिवाला ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हिमगिरी से प्राप्त की। बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली शशिवाला ने आगे की पढ़ाई राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चंबा से पूरी की। वर्तमान में वह बीएससी अंतिम वर्ष की छात्रा हैं।
खास बात यह है कि उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ बिना किसी कोचिंग के NEET की तैयारी जारी रखी। पहले प्रयास में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। अपनी कमियों पर काम करते हुए लगातार पढ़ाई जारी रखी और दूसरे प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी मेहनत को सफलता में बदल दिया।
27 वर्षों से दुकान पर नौकरी कर रहे पिता ने बेटी के सपनों को दिया सहारा
शशिवाला की सफलता के पीछे उनके परिवार का संघर्ष और सहयोग भी प्रेरणादायक है। उनके पिता भूपिंदर पाल शर्मा पिछले 27 वर्षों से भंजराड़ू मुख्य बाजार में गुप्ता परिवार की दुकान पर कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा और उसके डॉक्टर बनने के सपने को हमेशा प्राथमिकता दी।
भूपिंदर पाल शर्मा का कहना है कि गुप्ता परिवार ने उन्हें हमेशा अपने परिवार के सदस्य की तरह सम्मान और सहयोग दिया, जिससे उन्हें अपनी बेटी की पढ़ाई को आगे बढ़ाने में मदद मिली। शशिवाला की माता सुमित्रा देवी गृहिणी हैं और परिवार को संभालते हुए बेटी की शिक्षा में लगातार उनका हौसला बढ़ाती रही हैं।
माता-पिता और गुरुजनों को दिया सफलता का श्रेय
शशिवाला अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया और मुश्किल समय में भी उन्हें अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटने दिया।
उनका सपना एक सफल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। वह चाहती हैं कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों की बेटियां भी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी न मानें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करें।
चुराह की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
शशिवाला की सफलता से पंझेई पंचायत, हिमगिरी और पूरे चुराह क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य परिवार और ग्रामीण परिवेश से निकलकर हासिल की गई उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
शशिवाला की सफलता यह संदेश देती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए बड़े संसाधनों से कहीं अधिक जरूरी दृढ़ संकल्प, परिवार का साथ और लगातार मेहनत है।
