उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ने की संभावनाः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में ‘सिटी लिमिट्स-द क्राइसिज ऑफ अर्बनाइजेशन’ पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि भविष्य में उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बादल फटने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ने की संभावनाः मुख्यमंत्री

डलहौज़ी हलचल (शिमला): मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने मंगलवार सायं शिमला के Gaiety Theatre में नगर निगम शिमला के पूर्व उप-महापौर Tikender Panwar द्वारा संपादित पुस्तक ‘सिटी लिमिट्स-द क्राइसिज ऑफ अर्बनाइजेशन’ का विमोचन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ आबोहवा और पानी का अनमोल उपहार दिया है और इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश में सुनियोजित शहरीकरण और निर्माण बेहद आवश्यक है।

शिमला में चल रही बड़ी विकास परियोजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला शहर को तारों के जाल से मुक्त करने के लिए 145 करोड़ रुपये की लागत से भूमिगत डक्ट परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा सब्जी मंडी क्षेत्र में 600 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक परिसर विकसित किया जा रहा है तथा लिफ्ट क्षेत्र के पास अंडरपास भी प्रस्तावित है।

उन्होंने बताया कि शिमला में 24 घंटे जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 800 करोड़ रुपये की योजना क्रियान्वित की जा रही है। साथ ही सर्कुलर रोड चौड़ीकरण और हरित क्षेत्रों के विस्तार पर भी कार्य जारी है।

हिमाचल में दो बड़ी आपदाओं का जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिससे भारी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि अब बादल फटने की घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है क्योंकि ऐसी घटनाएं अब केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि निचले क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के साथ बैठक के दौरान उन्होंने यह चिंता भी जताई थी कि भविष्य में बादल फटने की घटनाएं केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में भी इनकी संख्या बढ़ सकती है।

पर्यावरण संतुलन पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। हिम-चंडीगढ़, हिम-पंचकूला और कांगड़ा में एयरो सिटी जैसी नई शहरीकरण परियोजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

संस्थागत जवाबदेही की जरूरत: न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान

कार्यक्रम में झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश Tarlok Singh Chauhan ने कहा कि लोगों को अपने आचरण और जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्ण संस्थागत जवाबदेही बेहद जरूरी है और शहरीकरण केवल जनसंख्या वृद्धि नहीं बल्कि समाज के पुनर्गठन की प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि पार्किंग व्यवस्था के अभाव के बावजूद वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है और ट्रैफिक जाम के लिए केवल पर्यटक नहीं बल्कि स्थानीय वाहन भी जिम्मेदार हैं।

कार्यक्रम में शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, शिक्षा सचिव राकेश कंवर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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