कुत्ते के काटने के बाद अस्पतालों के चक्कर काटता रहा परिवार, डलहौजी-बनीखेत-बाथरी में नहीं मिली एंटी-रेबीज वैक्सीन
डलहौज़ी हलचल | डलहौज़ी
उपमंडल डलहौजी के गोली निवासी रमेश के पुत्र ऋतिक को कुत्ते के काटने के बाद सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने से परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण परिवार को अंततः निजी क्लिनिक में जाकर वैक्सीन लगवानी पड़ी।
तीन सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नहीं मिली वैक्सीन
पीड़ित के पिता रमेश ने बताया कि घटना के तुरंत बाद वह सबसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाथरी पहुंचे। वहां एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने पर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनीखेत भेजा गया। वहां भी वैक्सीन नहीं मिली। इसके बाद वे सिविल अस्पताल डलहौजी पहुंचे, लेकिन वहां भी एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था।
उन्होंने बताया कि मजबूरी में उन्हें अपने बेटे का उपचार निजी क्लिनिक में करवाना पड़ा, जहां एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई।
स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, ऐसे में सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
समय पर टीकाकरण जीवन बचाने के लिए जरूरी
स्थानीय लोगों ने कहा कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है और कुत्ते के काटने के बाद समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण मरीज की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी होता है। यदि सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होगी तो मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग
क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि उपमंडल डलहौजी के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि आपात स्थिति में किसी भी मरीज को समय पर उपचार मिल सके और उसे निजी अस्पतालों का रुख न करना पड़े।
