हिमाचल की 2183 सड़कों को मिलेगी कानूनी मंजूरी! मुख्यमंत्री ने वन भूमि हस्तांतरण योजना बनाने के दिए निर्देश
डलहौज़ी हलचल | शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के प्रावधानों और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप 2183 सड़कों के लिए वन भूमि हस्तांतरण (भू-डायवर्जन) की व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। ये वे सड़कें हैं जो वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए), 1980 की स्वीकृति के बिना निर्मित की गई थीं।
ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण संपर्क अवसंरचना को मजबूत करने और दूरदराज क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इन सड़कों का उपयोग हजारों ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है और कई दुर्गम क्षेत्रों के लिए ये सड़कें जीवनरेखा के समान हैं।
उन्होंने कहा कि आपदा संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान भी इन सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
एफआरए लागू होने से पहले बनी थीं अधिकांश सड़कें
मुख्यमंत्री ने बताया कि संबंधित सड़कें वर्ष 2006 में वन अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले बनाई गई थीं। इसके बावजूद इनकी वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया लंबित रही। वर्ष 2016 से 2026 के बीच केवल 150 सड़क मामलों को ही मंजूरी मिल पाई, जबकि बड़ी संख्या में मामले अभी भी लंबित हैं।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद तेज होगी प्रक्रिया
बैठक में जानकारी दी गई कि इस विषय को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके बाद न्यायालय ने विभाग को एफआरए के प्रावधानों के तहत सभी मामलों की प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके।
दूरदराज क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
सरकार की इस पहल से प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में स्थित हजारों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सड़कों के रखरखाव, उन्नयन और विकास कार्यों को भी गति मिल सकेगी।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य सचिव के.के. पंत, महाधिवक्ता अनूप रतन, विशेष सचिव (वन) विजय कुमार तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
