हिमाचल प्रदेश: मुसलमानों के बहिष्कार की बात करने वाली महिला की मुश्किलें बढ़ीं, FIR के बाद निलंबन संभव

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डलहौज़ी हलचल (कांगड़ा) : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार को लेकर आपत्तिजनक बयान देने वाली महिला सुषमा देवी पर कार्रवाई तेज हो गई है। लंबागांव वार्ड की पंचायत समिति सदस्य (BDC) सुषमा देवी के खिलाफ पहले FIR दर्ज की गई और अब डीसी कांगड़ा ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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क्या है मामला?

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23 नवंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें सुषमा देवी कश्मीरी व्यापारियों और मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ बातें कर रही थीं। वीडियो में वह मुसलमानों से सामान न खरीदने और उन्हें “जय श्री राम” बोलने के लिए मजबूर करती नजर आईं। इसके साथ ही, उन्होंने हिंदू दुकानदारों से ही खरीदारी करने की अपील की।

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FIR दर्ज, कानूनी धाराएं लागू

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महिला के खिलाफ लंबागांव पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 299 (धार्मिक भावनाएं भड़काना) और 196 (सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसपी कांगड़ा ने निर्देश देकर कार्रवाई को आगे बढ़ाया है।

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निलंबन की संभावना

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  • डीसी कांगड़ा द्वारा जारी नोटिस में सुषमा देवी को 7 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
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  • जिला पंचायत अधिकारी धर्मशाला, नीलम कटोच ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम किसी भी लोक सेवक को ऐसा आचरण करने की अनुमति नहीं देता।
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  • पंचायतीराज एक्ट में इस तरह के अनुचित आचरण पर निलंबन का प्रावधान है।
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  • जांच रिपोर्ट और FIR के आधार पर निलंबन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
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संविधान और शपथ का उल्लंघन

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एक लोक सेवक होने के नाते सुषमा देवी पर पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने और संविधान द्वारा निर्धारित मूल्यों का उल्लंघन करने के आरोप लगे हैं। जब कोई पंचायत सदस्य चुना जाता है, तो उसे निष्पक्षता और सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार की शपथ दिलाई जाती है। वीडियो वायरल होने के बाद हिमाचल के लोगों और विभिन्न संगठनों ने इस बयान की कड़ी निंदा की। राज्य के कानून और व्यवस्था के तहत ऐसे किसी भी बयान को गंभीरता से लिया जा रहा है, जो सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न कर सकता है।

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आगे की कार्रवाई

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जिला प्रशासन और पुलिस ने साफ किया है कि हिमाचल प्रदेश में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। यदि सुषमा देवी जवाब देने में विफल होती हैं या उनका जवाब असंतोषजनक पाया जाता है, तो उनके खिलाफ निलंबन की कार्यवाही तय मानी जा रही है।

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