हिमाचल के रेशम किसानों ने रचा इतिहास, खुले नीलामी बाजार में मिला ₹1960 प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड मूल्य
डलहौज़ी हलचल | शिमला
हिमाचल प्रदेश के रेशम (सेरीकल्चर) क्षेत्र के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया। प्रदेश के कोया उत्पादक किसानों को खुले नीलामी बाजार में उनकी उपज का ₹1960 प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त हुआ है, जो राज्य के सेरीकल्चर इतिहास में अब तक का सर्वाधिक मूल्य माना जा रहा है। इस उपलब्धि ने न केवल रेशम कृषकों की मेहनत को नई पहचान दिलाई है, बल्कि राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और सेरीकल्चर क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयासों को भी नई मजबूती प्रदान की है।
रेशम किसानों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
रिकॉर्ड मूल्य मिलने से प्रदेश के हजारों रेशम किसानों में उत्साह का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से अधिक किसान रेशम उत्पादन की ओर आकर्षित होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रदेश के सभी रेशम कृषकों, विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
‘हिम सिल्क मिशन’ को मिली बड़ी सफलता
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रस्तुत राज्य बजट में रेशम क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘हिम सिल्क मिशन’ की घोषणा की गई है, जिसके लिए ₹2 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत गुणवत्तायुक्त कोया उत्पादन, शहतूत रोपण का विस्तार, आधुनिक तकनीकों का प्रसार, महिला एवं युवा सहभागिता को बढ़ावा देने तथा विपणन सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्राप्त रिकॉर्ड मूल्य इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार की नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं और आने वाले वर्षों में हिमाचल प्रदेश का रेशम क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा।
किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाना सरकार की प्राथमिकता
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इस उपलब्धि को प्रदेश के रेशम कृषकों के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा किसानों को गुणवत्तायुक्त कीट बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, रोग प्रबंधन तथा विपणन सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप कोया की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।
पारदर्शी नीलामी प्रणाली का मिला लाभ
उद्योग मंत्री ने बताया कि प्रदेश में संचालित खुले एवं पारदर्शी कोया नीलामी बाजार किसानों को प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ₹1960 प्रति किलोग्राम का यह मूल्य न केवल हिमाचल प्रदेश के लिए रिकॉर्ड है, बल्कि देशभर के रेशम उत्पादक राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण समृद्धि को मिलेगा बढ़ावा
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि ‘हिम सिल्क मिशन’ के माध्यम से उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा। इससे किसानों को उनकी मेहनत का अधिकतम लाभ मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को उच्च गुणवत्ता वाले बाइवोल्टाइन रेशम उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनाना है। यह मिशन महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसानों की मेहनत और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम
उद्योग मंत्री ने इस सफलता का श्रेय किसानों की अथक मेहनत, विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों तथा मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रिकॉर्ड मूल्य मिलने से प्रदेश के अधिक से अधिक किसान रेशम उत्पादन से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री ने प्रदेश के सभी रेशम कृषकों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में हिमाचल का सेरीकल्चर क्षेत्र ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनेगा।
