धर्मशाला में गणित एवं अर्थशास्त्र पर राष्ट्रीय सम्मेलन, 350 प्रतिभागियों ने की सहभागिता

गणित, अर्थशास्त्र और AI पर मंथन: धर्मशाला में जुटे देशभर के शिक्षाविद और शोधार्थी
धर्मशाला में गणित एवं अर्थशास्त्र पर राष्ट्रीय सम्मेलन, 350 प्रतिभागियों ने की सहभागिता

डलहौज़ी हलचल | धर्मशाला

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में गणित एवं अर्थशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। “गणित एवं अर्थशास्त्र में अंतर्विषयक प्रगति: अनुप्रयोग एवं चुनौतियाँ” विषय पर आधारित यह सम्मेलन पीएम उषा योजना के अंतर्गत वित्तपोषित है, जिसमें देशभर के शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

डीआईजी सौम्या साम्बशिवन ने किया सम्मेलन का उद्घाटन

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में डीआईजी नॉर्दर्न रेंज सौम्या साम्बशिवन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में गणित और अर्थशास्त्र के बढ़ते महत्व तथा समाज, प्रशासन और नीति निर्माण में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया में दोनों विषयों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

350 प्रतिभागियों ने कराया पंजीकरण, 127 शोध पत्र हुए प्रस्तुत

सम्मेलन निदेशक एवं क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला के निदेशक प्रो. कुलदीप कुमार अत्री ने मुख्य अतिथि सहित सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। सम्मेलन संयोजक डॉ. तिलकराज शर्मा ने कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि सम्मेलन में लगभग 350 प्रतिभागियों ने पंजीकरण करवाया है, जबकि 127 शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। सम्मेलन में देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए लगभग 220 विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।

आर्थिक पूर्वानुमान से लेकर AI तक विषयों पर हुई चर्चा

सम्मेलन में केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. अश्वनी कुमार नंदा ने मुख्य बीज वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। उन्होंने आर्थिक पूर्वानुमान, वित्तीय बाजारों के विश्लेषण, जोखिम प्रबंधन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में गणितीय मॉडलों की भूमिका को विस्तार से समझाया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जटिल आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।

शोधार्थियों ने साझा किए नवीन शोध और विचार

सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों और शिक्षकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों में आर्थिक विकास, डिजिटल वित्त, सांख्यिकीय मॉडलिंग, पर्यावरणीय अर्थशास्त्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा विश्लेषण और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने गणितीय उपकरणों और आर्थिक सिद्धांतों के समन्वय से उत्पन्न हो रही नई संभावनाओं और चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

शिक्षा और शोध के लिए उपयोगी मंच साबित हुआ सम्मेलन

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गणित और अर्थशास्त्र के बीच बढ़ते अंतर्संबंधों, उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों तथा समकालीन चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श करना रहा। कार्यक्रम ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित करने तथा नवीन शोध प्रवृत्तियों को समझने का अवसर प्रदान किया।

अनेक शिक्षाविदों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता

सम्मेलन में सम्मेलन सलाहकार प्रो. डी.पी. वर्मा, सह-संयोजक डॉ. विजयता पठानिया, डॉ. रामरतन, आयोजन सचिव डॉ. श्वेता पठानिया, डॉ. कंचन बाला सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. किशोर कुमार ने मुख्य अतिथि, बीज वक्ता, विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया तथा सम्मेलन की सफलता में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया।

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