अब थेरेपी पहुंचेगी बच्चों के घर-द्वार! मुख्यमंत्री ने ‘थेरेपी ऑन व्हील्स’ को दिखाई हरी झंडी

हिमाचल में थेरेपी ऑन व्हील्स सेवा शुरू। मंडी, शिमला और कांगड़ा में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मोबाइल थेरेपी और पुनर्वास सुविधा मिलेगी।
अब थेरेपी पहुंचेगी बच्चों के घर-द्वार! मुख्यमंत्री ने ‘थेरेपी ऑन व्हील्स’ को दिखाई हरी झंडी

डलहौज़ी हलचल | शिमला

हिमाचल प्रदेश में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत ‘मोबाइल रिसोर्स सेंटर-थेरेपी ऑन व्हील्स’ की नवीन पहल के तहत तीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस पहल के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनके क्षेत्र के नजदीक ही थेरेपी, पुनर्वास, विशेष शिक्षा और अन्य आवश्यक सहायता सेवाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा।

मंडी, शिमला और कांगड़ा में शुरू होगी सेवा

‘थेरेपी ऑन व्हील्स’ पहल को प्रारंभिक चरण में हिमाचल प्रदेश के तीन जिलों मंडी, शिमला और कांगड़ा में संचालित किया जाएगा।

इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इस सेवा का विस्तार प्रदेश के सभी जिलों तक किया जाएगा। विशेष रूप से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों और उनके परिवारों को इस पहल से लाभ मिलने की उम्मीद है।

मोबाइल रिसोर्स सेंटर में मिलेंगी कई विशेष सुविधाएं

मोबाइल रिसोर्स सेंटर के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इनमें—

  • फिजियोथेरेपी
  • ऑक्यूपेशनल थेरेपी
  • स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी
  • विशेष शिक्षा
  • स्क्रीनिंग और आवश्यकता आधारित मूल्यांकन
  • बहु-विषयक थेरेपी एवं पुनर्वास सेवाएं
  • अभिभावकों को परामर्श और मार्गदर्शन
  • कार्यात्मक क्षमताओं एवं आत्मनिर्भरता बढ़ाने का प्रशिक्षण
  • आवश्यकता पड़ने पर फॉलो-अप और रेफरल सेवाएं

शामिल हैं।

बच्चों की शीघ्र पहचान और स्क्रीनिंग में भी मिलेगी मदद

‘थेरेपी ऑन व्हील्स’ पहल के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शीघ्र पहचान, स्क्रीनिंग और मूल्यांकन की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।

इसके साथ ही अभिभावकों की काउंसलिंग, जागरूकता कार्यक्रम तथा शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी।

समावेशी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

यह पहल समग्र शिक्षा के समावेशी शिक्षा घटक के तहत सैम्फिया फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस पहल से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शैक्षणिक सहभागिता, संचार कौशल, कार्यात्मक क्षमताओं, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में सुधार होगा।

इससे अभिभावक और शिक्षक भी बच्चों को घर और विद्यालय में बेहतर तथा निरंतर सहयोग प्रदान करने में सक्षम बन सकेंगे।

दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों को होगा विशेष लाभ

हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विशेष सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण कई परिवारों को बच्चों की थेरेपी और पुनर्वास के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता है।

‘मोबाइल रिसोर्स सेंटर-थेरेपी ऑन व्हील्स’ पहल इन चुनौतियों को कम करने में सहायक साबित हो सकती है और जरूरतमंद बच्चों तक आवश्यक सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस अवसर पर समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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