चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में 3,000 लोगों पर हुआ अध्ययन, जनजातीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य चुनौतियां आईं सामने
डलहौज़ी हलचल | शिमला
जनजातीय विकास विभाग द्वारा हिमाचल प्रदेश की जनजातीय आबादी में यौन संचारित रोगों (Sexually Transmitted Diseases) की व्यापकता, जोखिम कारकों और उपचार प्राप्त करने के व्यवहार पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोध रिपोर्ट जारी की गई है। रिपोर्ट को अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजातीय विकास ओंकार चंद शर्मा ने औपचारिक रूप से जारी किया।
यह अध्ययन जनजातीय विकास विभाग और आईजीएमसी शिमला के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संयुक्त सहयोग से तैयार किया गया है।
चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में किया गया अध्ययन
अध्ययन जिला चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के लगभग 3,000 प्रतिभागियों पर आधारित है। शोध के दौरान जनजातीय क्षेत्रों में यौन संचारित रोगों से जुड़े लक्षणों, जागरूकता स्तर, जोखिम कारकों और उपचार प्राप्त करने की प्रवृत्तियों का विस्तृत आकलन किया गया।
रिपोर्ट में दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।
जागरूकता, समय पर जांच और उपचार पर विशेष बल
शोध रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि जनजातीय क्षेत्रों में यौन संचारित रोगों के प्रति जागरूकता अभियान तेज किए जाएं। साथ ही समय पर जांच, उपचार और स्वास्थ्य परामर्श सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच मजबूत कर ऐसे रोगों की रोकथाम और नियंत्रण को बेहतर बनाया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने में मिलेगी मदद
अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा ने कहा कि अध्ययन के निष्कर्ष जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों और निष्कर्षों पर समयबद्ध तरीके से उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का रहा योगदान
इस अवसर पर संयुक्त सचिव जनजातीय विकास डॉ. विक्रम सिंह नेगी, अनुसंधान अधिकारी डॉ. रूपल सूद, प्रधान अन्वेषक प्रो. डॉ. अनमोल गुप्ता, सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित सचदेवा तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. अर्चित शर्मा भी उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार के शोध अध्ययन जनजातीय समुदायों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
