उहल चरण-तीन जलविद्युत परियोजना से हिमाचल को सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये की आय का दावा, ऊर्जा उत्पादन में आई तेजी
डलहौज़ी हलचल | मंडी
मंडी जिले के जोगिंदर नगर क्षेत्र स्थित उहल चरण-तीन जलविद्युत परियोजना अब पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रही है। राज्य सरकार के अनुसार वर्षों तक तकनीकी और वित्तीय चुनौतियों का सामना करने के बाद परियोजना से अब स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 200 करोड़ रुपये की आय सुनिश्चित हो रही है।
सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में परियोजना की लंबित वित्तीय एवं प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर इसे सफलतापूर्वक संचालित किया गया।
अब तक 465 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन
उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना से अब तक लगभग 465 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो माह के संचालन के दौरान लगभग 25 मिलियन यूनिट बिजली उत्पन्न हुई। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने लगभग 345 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक करीब 95 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की जा चुकी है।
परियोजना का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 390 मिलियन यूनिट निर्धारित किया गया है और प्रबंधन को इस वर्ष लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है।

वित्तीय चुनौतियां दूर करने के लिए उठाए गए कदम
सरकार के अनुसार मार्च 2023 में मुख्यमंत्री द्वारा परियोजना की समीक्षा के बाद लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए। परियोजना की वित्तीय चुनौतियों को दूर करने के लिए केसीसी बैंक के माध्यम से लगभग 185 करोड़ रुपये का ऋण कम ब्याज दर पर उपलब्ध कराया गया, जिससे मरम्मत और बहाली के कार्य पूरे किए गए।
इसके अतिरिक्त, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) के ऋण पर ब्याज दर में कमी किए जाने से परियोजना को प्रतिवर्ष लगभग 30 करोड़ रुपये की बचत होने का दावा किया गया है।
सरकार को भी मिलेगा राजस्व का हिस्सा
राज्य सरकार के अनुसार परियोजना के नियमित संचालन से ऋण की मूलधन एवं ब्याज अदायगी की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। वर्तमान औसत दर लगभग 5 रुपये प्रति यूनिट के आधार पर परियोजना से सालाना करीब 200 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है।
सरकार का कहना है कि परियोजना की आय का 13 प्रतिशत हिस्सा सीधे हिमाचल प्रदेश सरकार को प्राप्त होगा, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। इस राशि का उपयोग विभिन्न जनकल्याण एवं विकास कार्यों में किया जाएगा।

उत्पादन प्रभावित होने का भी बताया कारण
परियोजना के प्रबंध निदेशक देवेंद्र कुमार के अनुसार पिछले वर्ष निर्धारित लक्ष्य से कम उत्पादन का मुख्य कारण शानन जलविद्युत परियोजना का लगभग एक माह तक बंद रहना था। इसके कारण परियोजना को मिलने वाला 23 क्यूसेक पानी उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ। हालांकि वर्तमान में उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि
सरकार का कहना है कि उहल चरण-तीन जलविद्युत परियोजना प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार, राजस्व और क्षेत्रीय विकास के नए अवसर भी उपलब्ध करा रही है। साथ ही इसे भविष्य की अन्य ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
