डलहौज़ी हलचल (चंबा): ऐतिहासिक नगरी चंबा की साहित्यिक विरासत को सहेजने और युवाओं में रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ी घोषणा की गई है। उपायुक्त चंबा मुकेश रेपसवाल (DC Mukesh Repaswal) ने आज बचत भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में स्पष्ट किया कि ‘चंबा साहित्य उत्सव’ (Chamba Sahitya Utsav) अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक नियमित वार्षिक परंपरा बनेगा। इस अवसर पर उन्होंने उत्सव को सफल बनाने वाली विभूतियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया।
साहित्यिक गतिविधियों के लिए बनेगा वार्षिक कैलेंडर
उपायुक्त ने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चंबा के तत्वावधान में इस उत्सव के नियमित आयोजन की बात कही। उन्होंने महाविद्यालय प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए कि जिला स्तर पर अंतर-महाविद्यालय साहित्यिक गतिविधियों (Inter-College Literary Events) के लिए एक विस्तृत वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने जिला भाषा अधिकारी को भी इन गतिविधियों को विभिन्न महाविद्यालय परिसरों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

संस्था के पंजीकरण और जनभागीदारी का सुझाव
DC Mukesh Repaswal ने आयोजन की निरंतरता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित संस्था के पंजीकरण का सुझाव दिया। उन्होंने स्थानीय जनभागीदारी बढ़ाने के लिए सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक शिक्षा डॉ. विद्यासागर शर्मा से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उपायुक्त ने कहा, “प्रशासन इस उत्सव को हर संभव वित्तीय और प्रबंधकीय सहायता उपलब्ध करवाएगा।”

डिजिटल मंच पर नवोदित रचनाकारों को मिलेगा स्थान
अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) अमित मैहरा ने नवोदित साहित्यकारों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी रचनाएं और काव्य पाठ महाविद्यालय प्रशासन या जिला भाषा अधिकारी को भेज सकते हैं। इससे उन्हें न केवल एक सशक्त डिजिटल मंच मिलेगा, बल्कि चंबा साहित्य उत्सव के सोशल मीडिया हैंडल भी जीवंत बने रहेंगे।
अनुभवों का साझा और सम्मान का दौर
समारोह में राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश राठौर, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत रमन रवि और जिला भाषा अधिकारी तुकेश शर्मा ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान शिवानी, आफरीन मलिक और चिंतन कुमार सहित कई विद्यार्थियों ने उत्सव के दौरान मिले अपने अनुभवों को साझा किया। सफल आयोजन के लिए पूरी टीम, प्रेस प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों के योगदान को सराहा गया।











