डलहौज़ी हलचल (शिमला): हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC), शिमला में अत्याधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन किया। इस उद्घाटन के साथ ही प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में पहली बार पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पैट) स्कैन की सुविधा जनता के लिए उपलब्ध हो गई है।
कैंसर के सटीक इलाज में ‘पैट स्कैन’ बनेगा गेम चेंजर
मुख्यमंत्री ने बताया कि पैट स्कैन तकनीक रोगों का प्रारंभिक, मेटाबॉलिक और मॉलिक्यूलर स्तर पर पता लगाने में सक्षम है।
प्रारंभिक पहचान: पारंपरिक सीटी (CT) और एमआरआई (MRI) की तुलना में यह तकनीक शारीरिक परिवर्तनों का बहुत पहले पता लगा लेती है।
उपयोगिता: यह सुविधा कैंसर के स्टेज निर्धारण, उपचार के प्रभाव के आकलन और बीमारी की पुनरावृत्ति का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
किन बीमारियों में सहायक: मस्तिष्क ट्यूमर, थायरॉयड, लंग्स, ब्रेस्ट, और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर सहित हृदय रोग और न्यूरोलॉजी के मामलों में यह तकनीक वरदान साबित होगी।

सपैक्ट-सीटी स्कैन मशीन के लिए 8 करोड़ की घोषणा
स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी शिमला में स्पैक्ट-सीटी (SPECT-CT) स्कैन मशीन स्थापित करने के लिए 8 करोड़ रुपये की तत्काल घोषणा की। उन्होंने कहा कि हाल ही में संस्थान में 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का भी शुभारम्भ किया गया है, जो मरीजों के लिए बड़ी राहत है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश
मुख्यमंत्री ने सरकार के विजन को साझा करते हुए कहा:
“राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों के तकनीकी उन्नयन के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को घर के पास ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।”

गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा, संजय अवस्थी, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और चिकित्सक उपस्थित रहे।
आईजीएमसी में इस नई सुविधा के शुरू होने से अब गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को महंगे पैट स्कैन के लिए निजी अस्पतालों या बाहरी राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।











