डलहौज़ी हलचल (धर्मशाला): जिला कांगड़ा के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने और युवाओं व किसानों को स्वावलंबी बनाने के लिए आज एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। धर्मशाला स्थित जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सभागार में आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार समिति (DLRC) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे शिक्षा, कृषि और पशुपालन जैसे उत्पादक क्षेत्रों में ऋण (Loan) वितरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
ढगवार मिल्क प्लांट से खुलेंगे स्वरोजगार के द्वार
डीसी हेमराज बैरवा ने भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि ढगवार दुग्ध प्लांट जल्द ही क्रियाशील होने जा रहा है। इससे जिले में श्वेत क्रांति के साथ-साथ रोजगार के अपार अवसर पैदा होंगे। उन्होंने बैंकों से आह्वान किया कि वे गौ-पालन और डेयरी सेक्टर से जुड़े किसानों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध करवाएं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।
ऋण वितरण का रिपोर्ट कार्ड: लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
बैठक का संचालन करते हुए अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) पृथ्वी रणवीर ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़े साझा किए:
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कुल लक्ष्य: ₹8945.20 करोड़।
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दिसंबर 2025 तक उपलब्धि: ₹6677.01 करोड़ (कुल लक्ष्य का 74.64%)।
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कृषि क्षेत्र: ₹1755.42 करोड़ का ऋण वितरित।
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MSME क्षेत्र: ₹3787.98 करोड़ का ऋण वितरण।
हालांकि, जिले का ऋण-जमा अनुपात (CD Ratio) 26.09% रहा, जिस पर उपायुक्त ने चिंता जताते हुए सभी बैंकों को इसे बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
डिजिटल खेती और वेयरहाउसिंग पर जोर
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक हिमांशु साहू ने किसानों के लिए ई-किसान उपज निधि और क्रेडिट गारंटी जैसी डिजिटल पहलों की जानकारी दी। उन्होंने मत्स्य पालन और कोल्ड स्टोरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए ऋण प्रवाह को सुदृढ़ करने पर बल दिया। बैठक में स्वयं सहायता समूहों (SHG) और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के विस्तार पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
इस उच्च स्तरीय बैठक में आरबीआई प्रतिनिधि तरुण चौधरी, पीएनबी के उपमंडल प्रमुख भरत कैलाश चंद्र ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के आला अधिकारी और बैंक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

