सूचनाओं के तेज प्रवाह में आवश्यक है मीडिया की विश्वसनीयता - डॉ. निपुण जिंदल

सूचनाओं के तेज प्रवाह में आवश्यक है मीडिया की विश्वसनीयता - डॉ. निपुण जिंदल

सूचनाओं के तेज प्रवाह में आवश्यक है मीडिया की विश्वसनीयता - डॉ. निपुण जिंदल

डलहौजी हलचल (धर्मशाला) : मीडिया समाज का आईना है, इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की संज्ञा भी दी गई है। इस नाते सूचनाओं के तेज प्रवाह के इस दौर में मीडिया की विश्वसनीयता बहुत आवश्यक है, जरूरी है कि मीडिया सशक्त रहे और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को पूर्ण करे। यह विचार जिलाधीश कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल ने आज (बुधवार) राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर धर्मशाला के कैबिनेट हॉल में आयोजित जिला स्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।
‘राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में पत्रकारों ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. खुशाल शर्मा सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा अतिरिक्त उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ और सहायक आयुक्त ओम कांत ठाकुर ने भी सम्मेलन में विशेषतौर पर भाग लिया।  
डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि मीडिया में सूचनाओं के प्रवाह का बड़ा महत्व है और शासन-प्रशासन की ओर से इसे अविरल बनाए रखना बहुत जरूरी है।  कई बार निहित स्वार्थों के चलते जानबूझ कर गलत सूचनाओं का संप्रेषण होता है, ये प्रवृति लोकतंत्र के लिए घातक है। इसे किसी भी स्तर पर बढ़ने नहीं देना चाहिए।
इतिहास, कला-संस्कृति से करवाएं रूबरू
जिलाधीश ने कहा कि खबर के त्वरित प्रसारण के दौर में अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए यह बहुत जरूरी है कि सूचना की सत्यता को परखा जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारिता ने जनजागरण और विदेशी शासन को चुनौती देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उसी प्रकार आज भी लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को जीवित रखने के लिए मीडिया अपनी जिम्मेदारियों को जितना बेहतर समझेगा राष्ट्र निर्माण में उसका उतना सहयोग हो पाएगा। उन्होंने कहा कि देश हित के समाचारों को प्राथमिकता देते हुए मीडिया को हमारे धरोहर, इतिहास और कला-संस्कृति से जुड़े विषयों से भी लोगों को रूबरू करवाना चाहिए। यह भी राष्ट्र निर्माण और उससे जुड़े घटकों को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कार्य होगा।
डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि समय के साथ सूचनाओं के प्रवाह और प्रसारण की गति में एक जबरदस्त परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि पहले जो खबर घटना घटने के लगभग एक दिन बाद मिलती थी। आज मीडिया के विस्तार के कारण वह सूचना उसी समय लोगों तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में मीडिया की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
उन्होंने सूचना जन संपर्क विभाग को युवा पत्रकारों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन को लेकर प्रयास करने को कहा। इन कार्यशालाओं के जरिए विशेषज्ञों द्वारा युवा पत्रकारों को पत्रकारिता के गुर सिखाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
संवेदनशील प्रशासन की एक और मानवीय पहल, पत्रकारों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम
डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि ये देखा गया है कि दिन रात समाज के लिए अपने कार्य में लगे पत्रकार अपने स्वास्थ्य की देखभाल पर ध्यान नहीं देते। व्यस्तता के चलते भी नियमित स्वास्थ्य जांच का पहलू पीछे छूट जाता है। ऐसे में प्रशासन ने तय किया है जिले के सभी पत्रकारों के लिए सालाना निशुल्क स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम आरंभ किया जाएगा। इसमें उनकी सामान्य स्वास्थ्य जांच, स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और निदान को लेकर काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में बहुत जल्द शुरू इस कार्यक्रम को शुरू कर दिया जाएगा।
                                                                       

एक दूसरे के पूरक हैं मीडिया और प्रशासन - डॉ खुशाल शर्मा


इस अवसर पर एसपी कांगड़ा डॉ खुशाल शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि मीडिया और प्रशासन एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि समाज की भलाई के लिए मीडिया और प्रशासन को हमेशा सामंजस्य बनाकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का निर्माण ही नहीं अपितु राष्ट्र की एकात्मता में भी मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की समस्या को आगे लाकर उसके समाधान के लिए प्रयास करने का कार्य मीडिया करती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से एक पत्रकार को निरंतर कार्य करते रहना चाहिए।
      उन्होंने कहा कि समाज में सूचना प्रसारण का एक स्वच्छ उदाहरण पेश करते हुए मीडिया को किसी भी घटना पर अपने विचार देते वक्त पूर्वाग्रहों से पूरी तरह मुक्त रहना चाहिए और निष्पक्ष होकर सच्ची जानकारी समाज के सामने रखनी चाहिए।
वहीं, अतिरिक्त उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि सोशल मीडिया के समय में समाज को जागरूक करने और त्वरित सूचना पहुंचाने के कार्य के साथ मर्यादाओं का बोध भी बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आदर्शों से भरी पत्रकारिता समाज को जागरूक भी कर सकती है और गलत की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान भी आकर्षित कर सकती है।
      इस परिचर्चा मंे क्षेत्र के पत्रकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पत्रकारिता से जुड़े विषयों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। पत्रकारों के वास्तविक अनुभव कथनों और व्यवहारिक सुझावों से कार्यक्रम की सार्थकता सिद्ध हुई। कार्यक्रम में सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के उपनिदेशक रवि वर्मा ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया और राष्ट्र निर्माण में मीडिया की भूमिका विषय पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर जिला लोक सम्पर्क अधिकारी ने धन्यवाद ज्ञापित कर परिचर्चा को पूर्ण किया।