डलहौज़ी हलचल (सिरमौर/कपिल शर्मा): किताबी ज्ञान जब प्रकृति की गोद में व्यावहारिक अनुभव से मिलता है, तो सीखने का उत्साह दोगुना हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा राजकीय उच्च विद्यालय देवका में देखने को मिला, जहाँ प्री-वोकेशनल शिक्षा के तहत कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष ‘नेचर पार्क भ्रमण’ का आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय शैक्षिक यात्रा का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।
विज्ञान और संभावनाओं का संगम
भ्रमण के दौरान न केवल विद्यार्थियों ने वनस्पतियों की विविधता को करीब से देखा, बल्कि विद्यालय की विज्ञान अध्यापिका शीतल ठाकुर ने इसे भविष्य की संभावनाओं से भी जोड़ दिया। उन्होंने छात्रों को बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इको-टूरिज्म, वन विभाग और वृक्षारोपण जैसे क्षेत्रों में एक शानदार करियर का आधार भी बन सकता है।
अनुशासन और सुरक्षा का पाठ
प्रधानाचार्य पूनम कटोच के कुशल मार्गदर्शन में छात्रों को सुरक्षित भ्रमण के गुर सिखाए गए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अनिवार्य हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षिका किरण देवी की विशेष भूमिका रही, जिनके नेतृत्व में छात्रों ने अनुशासन के साथ ज्ञानवर्धक अनुभव साझा किए।
रोचक और व्यावहारिक सीख
विद्यार्थियों के लिए इस दौरान जलपान की भी समुचित व्यवस्था रही, जिससे भ्रमण का आनंद और बढ़ गया। इस गतिविधि के माध्यम से छात्रों में पर्यावरण के प्रति प्रेम और उसे बचाने का संकल्प जगाने का एक सार्थक प्रयास विद्यालय प्रबंधन द्वारा किया गया।

