डलहौज़ी हलचल (शिमला): हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से आज लोकभवन में प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सुशील ठाकुर और प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) पुरुषोत्तम तिवारी ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राज्य के वित्तीय प्रबंधन और ऑडिटिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता पर विस्तृत रिपोर्ट
भेंट के दौरान दोनों प्रधान महालेखाकारों ने राज्यपाल को अपने-अपने कार्यालयों की कार्यप्रणाली से अवगत करवाया। उन्होंने सरकारी व्यय में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
अधिकारियों ने राज्यपाल को सार्वजनिक वित्तीय प्रशासन को सुदृढ़ करने और इसकी दक्षता बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा शुरू की गई विभिन्न नई पहलों के बारे में भी विस्तार से बताया।
लेखा परीक्षा तंत्र का महत्व: राज्यपाल का संबोधन
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने चर्चा के दौरान वित्तीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा:
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प्रभावी ऑडिट: सार्वजनिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और प्रभावी लेखा परीक्षा (Audit) तंत्र अनिवार्य है।
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सुशासन: राज्य में सुशासन (Good Governance) और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने में महालेखाकार जैसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट प्रक्रियाओं को और अधिक सटीक और जवाबदेह बनाया जाए।











