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13 साल के संघर्ष का अंत: इच्छा मृत्यु पाने वाले हरीश राणा का निधन, परिवार ने अंगदान कर पेश की मिसाल

Dalhousie Hulchul

डलहौजी हलचल (नई दिल्ली/कांगड़ा):  सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की अनुमति पाने वाले देश के पहले व्यक्ति हरीश राणा का मंगलवार को AIIMS New Delhi में निधन हो गया। वह पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे और लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे जीवन जी रहे थे।

जानकारी के अनुसार लंबे समय से असहनीय स्थिति में जीवन जी रहे हरीश की पीड़ा को देखते हुए परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी थी। अदालत ने 11 मार्च को इस पर सहमति जताई, जिसके बाद चिकित्सकों की निगरानी में निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाइफ सपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटाया गया।

पलेटा गांव से संबंध रखने वाले हरीश राणा के निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके पिता अशोक राणा वर्ष 1989 में बेहतर भविष्य की तलाश में दिल्ली चले गए थे।

20 अगस्त 2013 को एक हादसे के बाद हरीश कोमा में चले गए थे। इसके बाद उनके माता-पिता ने 13 वर्षों तक उनका उपचार और देखभाल एक नवजात शिशु की तरह की। इलाज के लिए परिवार ने अपनी संपत्ति तक बेच दी और जीवनयापन के लिए सड़कों पर सैंडविच बेचकर खर्च जुटाया।

समय के साथ माता-पिता की उम्र और शारीरिक स्थिति कमजोर होती गई। अंततः उन्होंने अपने बेटे की पीड़ा को देखते हुए इच्छा मृत्यु का कठिन निर्णय लिया, जो मानवीय संवेदनाओं और माता-पिता के असीम प्रेम की मिसाल बन गया।

हरीश राणा के निधन के बाद उनके माता-पिता ने अंगदान का निर्णय लिया, ताकि जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी मिल सके।