डलहौज़ी हलचल (शिमला): हिमाचल प्रदेश के खाते में एक और बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि जुड़ गई है। भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग (Jal Shakti Department) को सिंचाई गणना 2023-2025 के अंतर्गत ‘प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई’ (MMI) गणना को सफलतापूर्वक और समय से पूर्व पूर्ण करने के लिए सम्मानित किया है। नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने यह पुरस्कार सचिव जल शक्ति विभाग डॉ. अभिषेक जैन को प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू को भेंट किया गया पुरस्कार
आज शिमला में मुख्य सचिव संजय गुप्ता और सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने औपचारिक रूप से यह पुरस्कार मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू को भेंट किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभाग के समर्पित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश सरकार की डेटा-आधारित योजना और बेहतर सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में सिंचाई परियोजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
समय सीमा से पहले लक्ष्य हासिल करने वाला बना हिमाचल
हिमाचल प्रदेश ने इस गणना कार्य को निर्धारित समय सीमा (दिसंबर 2025) से दो महीने पहले, यानी अक्टूबर 2025 में ही पूरा कर लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है, जिसकी झलक वर्ष 2026-27 के बजट में भी साफ दिखाई देती है।
हिमाचल की सिंचाई परियोजनाओं का लेखा-जोखा (MMI Census Data)
एमएमआई गणना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई से संबंधित आंकड़ों का एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना है। हिमाचल प्रदेश में इस गणना के तहत कुल 10 परियोजनाओं को शामिल किया गया है:
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प्रमुख परियोजनाएं (10,000 हेक्टेयर से अधिक): 01 (पूरी हो चुकी है)
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मध्यम परियोजनाएं (2,000 से 10,000 हेक्टेयर): 09 (07 पूरी, 02 निर्माणाधीन)
डेटा संग्रह के प्रमुख बिंदु:
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गणना के दौरान सीसीए (CCA), क्रॉप पैटर्न, लाभान्वित जनसंख्या और जल उपयोग जैसे 32 विभिन्न मानकों पर विस्तृत डेटा एकत्र किया गया।
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प्रमुख परियोजना में सृजित क्षमता का 64% और मध्यम परियोजनाओं में 84% उपयोग हो रहा है।
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वर्तमान में सभी 10 परियोजनाएं बाढ़ सिंचाई पद्धति (Flood Irrigation Method) पर आधारित हैं और मुख्य रूप से खरीफ व रबी की फसलों के लिए उपयोग की जा रही हैं।

