चंबा: हिमाचल प्रदेश के शिक्षकों और सरकार के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। इस बार विवाद का केंद्र है सरकार द्वारा 6 सितंबर को जारी की गई एक अधिसूचना, जिसमें हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के नियम 7-A को खत्म (विलोपित) कर दिया गया है। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ, चंबा ने इस फैसले को शिक्षक विरोधी करार देते हुए इसके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। यह नियम शिक्षकों के वेतनमान से जुड़ा था, जिसके तहत उन्हें एक निश्चित लाभ मिलता था। अब 3 जनवरी, 2022 से इस नियम को खत्म माने जाने के फैसले से शिक्षकों के वेतन में भारी कटौती होगी, जिससे उनमें भारी रोष है।
अध्यापक संघ के जिला प्रधान हरिप्रसाद शर्मा, महासचिव सतेंद्र राणा और अन्य पदाधिकारियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह फैसला सीधे तौर पर प्रवक्ता , टीजीटी और सीएंडवी श्रेणी के हजारों शिक्षकों को आर्थिक रूप से प्रभावित करेगा। जिला प्रधान हरिप्रसाद शर्मा ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। एक तरफ सरकार ने पहले ही पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू नहीं किया, जिससे शिक्षक पहले से ही नाराज थे। अब ऊपर से नियम 7-A को खत्म करके हमारे वेतनमान में और घाटा कर दिया गया है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने 4-9-14 ACP (सुनिश्चित कैरियर प्रगति) योजना को भी सीमित करके लगभग खत्म कर दिया है। इसके अलावा, लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते (DA) और नए पे-स्केल के एरियर का भी अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया है। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा ने कहा, “यह सरकार का भेदभावपूर्ण रवैया है। केंद्र और देश के अन्य राज्यों में कर्मचारियों को ऐसे वित्तीय लाभ मिल रहे हैं, जबकि हिमाचल में इन्हें छीना जा रहा है। यह शिक्षकों के साथ सरासर अन्याय है।”
मुख्यमंत्री से फैसला बदलने की गुहार
अध्यापक संघ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से विनम्र आग्रह किया है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और 6 सितंबर को जारी की गई इस शिक्षक-विरोधी अधिसूचना पर दोबारा विचार कर इसे तत्काल रद्द करें, ताकि हजारों शिक्षक साथियों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे राज्य स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।











