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IGMC लंगर विवाद: प्रशासन ने की उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेट जांच की मांग
 

डलहौज़ी हलचल (शिमला) : पिछले कई सालों से आईजीएमसी कैंसर अस्पताल के समीप चल रहे सरबजीत सिंह बॉबी निशुल्क लंगर का विवाद बढ़ता जा रहा है। आईजीएमसी प्रशासन द्वारा लंगर अवैध बताकर खाली करवाने के निर्देश देने के बाद प्रशासन ने अब उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेट जांच की मांग की है।  उन्होंने जिला प्रशासन को इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज करवाते हुआ कहा है कि लंगर की जांच की जाए। 

डॉक्टर जनक राज ने सोमवार को इस संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सरबजीत सिंह बॉबी का लंगर आईजीएमसी की संपत्ति पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि लंगर में बिजली और पानी का इस्तेमाल चोरी से किया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि सभी संस्थाओं का एक लेखा-जोखा होता है, जिसमें डोनेशन से आने वाले पैसे का हिसाब किताब होता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जिन्होंने भी बॉबी के लंगर को डोनेशन दिया है, उसके बारे में जानकारी लें उनका पैसा कहां कितना खर्च हुआ। एमएस ने बताया कि इस मामले में प्रशासन की ओर से समय-समय पर बॉबी को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब-तलब किया गया है, बावजूद इसके बॉबी ने उसे दरकिनार कर दिया और अवैध कब्जे पर लंगर चलाते रहे। एमएस ने कहा कि सरबजीत सिंह बॉबी टेंडर प्रक्रिया से आए हैं उनका स्वागत है, लेकिन आईजीएमसी की संपत्ति पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वहीँ डॉ. जनक राज ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुआ कहा है कि हम सब लोगों से कहना चाहते हैं कि लोगों को मिल रही फ़्री लंगर की सुविधायों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। दिसंबर 2020 में केवल लंगर के प्रबंधन को पारदर्शी तरीक़े से ग़ैरकानूनी से बदल कर क़ानूनी रूप में परिवर्तित किया गया था।

वर्तमान में आईजीएमसी में दो मुफ़्त लंगर सेवाएँ चल रही है। एक ऑल्माइटी ब्लेसिंज़ और दूसरी संस्था है नोफ़ेल वेलफ़ेयर कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था विशेष अपनी आमदनी से नहीं परंतु समाज की भागीदारी से उस हेतु को कर रहे हैं।

किसी भी सरकारी और ग़ैर सरकारी संस्था को सोसाययटी ऐक्ट 1860 के सेक्शन 12(E) के नियमानुसार अपने आय व्यय का पूरा हिसाब रखना क़ानूनन आवश्यक है ।

क्या किसी को समाजसेवा के नाम पर बिजली चोरी पानी चोरी करने और मनमर्ज़ी ढंग से अवैध क़ब्ज़े करने दिया जा सकता है समाजसेवा तो जनसहयोग से लोग कर रहें हैं और ऐसे प्रयोजनों का प्रबंधन नियमों और क़ानून के दायरे में रह कर  भी किया जा सकता है।

संस्था आईजीएमसी के नाम से कार्य कर रही इसलिए संस्थान के प्रशासन का दायित्व बनता है की नियमों का पालन सुनिश्चित करवाएँ। हम किसी की भी सत्यनिष्ठा एवं सेवा भाव पर सवाल नहीं उठा रहे पर देश में समाजसेवा के नाम पर हुए कारनामों से हम सब परिचित हैं।

प्रशासन ने किसी भी लंगर को अभी तक बंद नहीं करवाया है। एक संस्था को केवल ग़ैरकानूनी क़ब्ज़े,बिजली,पानी के अवैध कनेक्शन के लिए कार्यवाही के संकेत दिए हैं।

सच्चाई सबके सामने आना अति आवश्यक है और अपनी सचाई के लिए प्रशासन किसी भी अग्निपरीक्षा के लिए तैयार है। इसलिए हम उच्च स्तरिये जाँच या मैजिस्ट्रेट जाँच के लिए भी तैयार हैं।