Hindi News » breaking-news » international brainstorming on

आपदा प्रबंधन की चुनौतियों पर अंतरराष्ट्रीय मंथन, धर्मशाला में दो दिवसीय संगोष्ठी शुरू

Dalhousie Hulchul

डलहौज़ी हलचल (धर्मशाला), 16 मार्च। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र मोहली, धर्मशाला में “आपदा प्रबंधन में समसामयिक मुद्दे तथा चुनौतियाँ” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सोमवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। इसके उपरांत संगोष्ठी कक्ष में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय कुलगीत का श्रवण किया।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के कुलपति प्रो. महावीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि महानिदेशक होम गार्ड्स एवं सिविल डिफेंस सतवंत अटवाल त्रिवेदी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं।

कार्यक्रम के आरंभ में क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री ने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, वरिष्ठ विद्वानों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का औपचारिक स्वागत किया तथा उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. डी.पी. वर्मा ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता सतवंत अटवाल त्रिवेदी ने हिमाचल प्रदेश के मनाली, मंडी जिला के थुनाग तथा चंबा जिला के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, जिसके प्रभावी प्रबंधन के लिए सरकार, प्रशासन और समाज की संयुक्त भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने आपदा प्रबंधन बल द्वारा जनभागीदारी और जागरूकता के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी दी तथा आपदा से पहले, दौरान और बाद में महिलाओं की भूमिका और सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. महावीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पहले की तुलना में वर्तमान समय में जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि विश्व में चल रहे संघर्ष और युद्ध भी अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरणीय असंतुलन और जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देते हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय में हाल ही में स्थापित ग्रीन एनर्जी, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े शोध केंद्रों की जानकारी देते हुए बताया कि इन क्षेत्रों में विभिन्न शोध परियोजनाओं पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगोष्ठियों और सेमिनारों का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से विषय की गहराई से चर्चा और समाधान खोजने का प्रयास किया जाना चाहिए।

International brainstorming on

उन्होंने हिमाचल प्रदेश की लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों, लोक मान्यताओं और ग्रामीण इतिहास को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए बदलते वैश्विक परिवेश में डेटा साइंस की बढ़ती भूमिका पर भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय केंद्र के विकास के लिए संसाधनों की कमी न आने देने का आश्वासन देते हुए यहां एक बड़े सेमिनार हॉल के निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में डा. संजीव कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और संगोष्ठी के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी शिक्षकों, समितियों तथा प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर अतिथियों, प्रतिभागियों और शोधार्थियों के अलावा लगभग 180 विद्यार्थियों ने भी संगोष्ठी में भाग लिया।