नई दिल्ली/हिमाचल प्रदेश (प्रकाश शर्मा): सरकारी संपत्ति और जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) ने शुक्रवार (27 मार्च 2026) को लोकसभा में ‘जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया, जिसमें अवैध कब्जेदारों के लिए भारी जुर्माने और जेल की सजा का प्रस्ताव है।
जुर्माने का ‘टेलिस्कोपिक’ फॉर्मूला: जेब पर पड़ेगा भारी बोझ
विधेयक के अनुसार, सरकारी परिसरों पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों को अब लाइसेंस शुल्क के आधार पर भारी दंड भुगतना होगा:
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पहले महीने का दंड: संबंधित संपत्ति के निर्धारित लाइसेंस शुल्क का 40 गुना जुर्माना।
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निरंतर कब्जा: यदि कब्जा जारी रहता है, तो यह जुर्माना हर महीने 10 प्रतिशत की दर से बढ़ता जाएगा।
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बार-बार अपराध: दोबारा कब्जा करने वालों के लिए यह जुर्माना लाइसेंस शुल्क का 50 गुना तक हो सकता है।
जेल और भूमि मूल्य पर आधारित पेनल्टी
नए प्रावधानों के तहत केवल आर्थिक दंड ही नहीं, बल्कि आपराधिक कार्यवाही भी सुनिश्चित की गई है:
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जेल की सजा: सार्वजनिक गैर-आवासीय भूमि पर अवैध कब्जे के लिए 6 महीने तक की जेल का प्रावधान है।
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वार्षिक जुर्माना: जेल के साथ या उसके स्थान पर भूमि के कुल मूल्य का 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से जुर्माना लगाया जा सकता है।
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त्वरित बेदखली: कानून के तहत मजिस्ट्रेट को यह अधिकार दिया गया है कि वह दोषी को सजा सुनाने के साथ-साथ संपत्ति को तुरंत खाली करने (Eviction) का आदेश भी दे सके।
कानूनी ढांचे को मजबूती: आवासीय और गैर-आवासीय प्रावधान
विधेयक का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदारों की बेदखली) अधिनियम के मौजूदा कानूनी ढांचे को और अधिक सख्त बनाना है। इसमें आवासीय और गैर-आवासीय संपत्तियों के लिए अलग-अलग दंड श्रेणियां बनाई गई हैं, ताकि सरकारी भवनों और जमीनों के दुरुपयोग को पूरी तरह रोका जा सके।
जन विश्वास विधेयक 2026: क्या है सरकार का लक्ष्य?
जितिन प्रसाद ने सदन में स्पष्ट किया कि इस विधेयक के माध्यम से सरकार ‘Ease of Living’ और ‘Ease of Doing Business’ को बढ़ावा देना चाहती है। जहाँ एक ओर छोटे तकनीकी अपराधों को अपराधमुक्त (Decriminalize) किया जा रहा है, वहीं सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और अवैध कब्जे जैसे गंभीर मामलों में दंड को और अधिक प्रभावी बनाया गया है ताकि एक पारदर्शी शासन व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।










