ननाओं गांव का गौरव: प्रथम परमार बने फ्लाइंग ऑफिसर, गांववासियों ने किया भव्य स्वागत

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डलहौज़ी हलचल (पालमपुर) : हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित ननाओं गांव के प्रथम परमार ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। आज उनके सम्मान में गांव ननाओं में भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया।

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फ्लाइंग ऑफिसर प्रथम परमार ने अपने परिवार के साथ सबसे पहले कुल देवता अक्षैणा महादेव और कुल देवी सच्चियात व माता शीतला के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद बैंड-बाजों के साथ गांव ननाओं पहुंचे, जहां बुजुर्गों और परिवारजनों ने फूल मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया।

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गांववासियों का जोरदार स्वागत

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गांव के सामुदायिक भवन में आयोजित स्वागत समारोह में पूरे गांव ने पुष्पवर्षा और माला पहनाकर प्रथम परमार का स्वागत किया। इस मौके पर उनके दादा सुबेदार राय सिंह, उर्मिला देवी, प्रिंसिपल सर्वजीत सिंह, और चाचा भूपिंद्र सिंह ने उन्हें आशीर्वाद दिया।

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समारोह में स्थानीय विधायक विपिन परमार, भरमौर के विधायक डा. जनक राज, पूर्व विधायक देहरा होशियार सिंह और उनकी धर्मपत्नी पुनीता चंबियाल, और कैप्टन संजय पराशर (सीईओ, Marine India Ltd.) ने विशेष रूप से भाग लिया। उन्होंने प्रथम परमार को फूल मालाएं पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान महाकाली ग्रुप मंडी द्वारा आयोजित माता की चौकी ने अपने मधुर स्वरों से सभी का दिल जीत लिया। चौकी के उपरांत सभी उपस्थित मेहमानों के लिए भोज का आयोजन किया गया।

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सैन्य परंपरा की पांचवीं पीढ़ी

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फ्लाइंग ऑफिसर प्रथम परमार देश सेवा में अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं। उनके परदादा कैप्टन दयाल सिंह परमार द्वितीय विश्व युद्ध में, दादा सुबेदार राय सिंह 1965 और 1972 के भारत-पाक युद्ध तथा श्रीलंका शांति सेना में शामिल रहे। उनके चाचा कारगिल युद्ध में अग्रिम मोर्चे पर तैनात रहे।

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शिक्षा और प्रशिक्षण में उत्कृष्टता

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प्रथम परमार की प्राथमिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय रे डि कारखाना कपूरथला और कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल में हुई। इसके बाद उनका चयन महाराजा रणजीत सिंह AFPI मोहाली में हुआ। अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने NDA खड़कवासला में तीन वर्षों का कठोर प्रशिक्षण पूरा किया। इसके बाद उन्हें फाइटर पायलट बनने के लिए इंडियन एयरफोर्स अकादमी हैदराबाद भेजा गया, जहां से सफल प्रशिक्षण के उपरांत उन्हें भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में नियुक्ति मिली।

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कार्यक्रम का सफल आयोजन

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कार्यक्रम को सफल बनाने में पदम परमार, अजय परमार, और सूबेदार-मेजर चंद्रभान जी की विशेष भूमिका रही। कपूरथला से पधारे राकेश वशिष्ठ का भी कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा।

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परिवार और पुरे क्षेत्र के लिए यह गौरव का क्षण है, और प्रथम परमार की सफलता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।

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