सत्तनकुलम संरक्षित मौतें: पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रेवती की साहसिक स्वीकृति, जिन्होंने साथियों के खिलाफ मुख खोला

सत्तनकुलम में हाल ही में हुई संरक्षित मृत्यु की घटना ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रेवती ने साहसिक कदम उठाते हुए अपने साथी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुख खोला है। उनकी कथनी से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। रेवती ने बयान में कहा, “वे (पुलिसकर्मी) कहते थे कि […]

सत्तनकुलम में हाल ही में हुई संरक्षित मृत्यु की घटना ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रेवती ने साहसिक कदम उठाते हुए अपने साथी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुख खोला है। उनकी कथनी से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

रेवती ने बयान में कहा, “वे (पुलिसकर्मी) कहते थे कि बेनीक्स को अच्छी मार सहनी पड़ती है; वह मजबूत है; ऐसा लगता है कि वह सौ इडली खा गया हो।” इस कथन से ये स्पष्ट होता है कि बेनीक्स के साथ बार-बार अत्याचार किया गया था, जो अंततः उसकी मौत का कारण बना।

इस मामले की जांच राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा की जा रही है। पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रेवती का बयान जांच के दौरान प्राप्त हुआ और इसे सबूत के रूप में माना जा रहा है। उनके बयान ने पुलिस के अंदरूनी कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय नागरिक संगठनों ने प्रशासन से इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि दोषियों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर गहरे आक्रोश व्यक्त किए जा रहे हैं।

रेवती के अनुसार, बेनीक्स को पुलिस की हिरासत में हेराफेरी और बर्बर व्यवहार का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार पुलिसकर्मी इस तरह के अत्याचार को सामान्य बात समझते थे। इस बयान से पुलिस की छवि को धक्का पहुंचा है और मानवाधिकार समूहों द्वारा मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और दोषी पुलिसकर्मियों को सख्त सजा दी जाएगी। वहीं, पुलिस विभाग ने भी बयान जारी कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की है।

सत्तनकुलम की यह घटना हमारे देश में कस्टोडियल मौतों की बढ़ती समस्या पर एक गंभीर चेतावनी है। यह मामला मानव अधिकारों और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर गहरा प्रभाव डालेगा। आम जनता पुलिस से न्याय की उम्मीद करती है, और इस प्रकार की घटनाएं पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत बनाए रखने की चुनौती बन जाती हैं।

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