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कुशा व चील की चलार की राखियाँ बढ़ायेगी भाई की कलाई की शोभा
 

डलहौज़ी हलचल (सोलन) अमरप्रीत सिंह : देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वोकल फॉर लोकल का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री विभिन्न मंचो से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात करते है। जिसे जिला सोलन की महिलाएं काफी हद तक पूरा कर रही है। रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार 22 अगस्त को मनाया जाएगा । जिसके लिए जिला सोलन की स्वयम सहायता समूह की महिलाओं ने प्राकृतिक चीजों से राखी तैयार की है जो कि पूरी तरह ईको फ्रेंडली है और अन्य राखियों से सस्ती ही नहीं बल्कि आकर्षक भी है।

स्वयम सहायता समूह की महिलाओं ने चील की चलार ,कुषा और मौली से ये राखियाँ  अपने हाथों से तैयार की है। जो कि वह सोलन में प्रदर्शनी लगाकर बेची जा रही है। यह राखियाँ  जहां पवित्र होगी वहीं इन राखियों में महिलाओ ने विभिन्न तरह के बीज भी डालें   है जो कि नीचे आगामी समय में हरियाली देंगे। बात करते हुए स्वयम सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक चीजों से राखियां तैयार की है। पूजा में  काम आने वाली पवित्र कुषा से राखियां बनाई गई है वहीं चील की चलार का प्रयोग भी राखी बनाने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि उनकी राखियों  को लोग पसंद कर खरीद रहे है जिस से उनकी बेहतर आमदनी हो रही है।

वहीं राखी खरीदने आई युवती ने हस्तनिर्मित राखियों  को आकर्षक बताते हुए कहा कि यह पवित्र राखी उन्होनें अपने भाइयों के लिए खरीदी है साथ ही उन्होंने अन्य महिलाओं से भी इन पवित्र राखियों को खरीदने की बात कही । निश्चित तौर पर इस से जहां वोकल फॉर लोकल का सपना साकार हो रहा है वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत को  भी बल मिल रहा है।