पूर्वी तटीय रेलवे के सीमित क्षेत्र में कटौती से माल ढुलाई राजस्व प्रभावित नहीं होगा, मंत्रालय का बयान

नई दिल्ली: पूर्वी तटीय रेलवे के जिले कम करने के फैसले को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के बीच रेलवे मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का क्षेत्रीय आय पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस घोषणा के बाद विवाद ने नया मोड़ लिया है, जहां विपक्ष ने आरोप लगाया था कि स्टेशन […]

नई दिल्ली: पूर्वी तटीय रेलवे के जिले कम करने के फैसले को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के बीच रेलवे मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का क्षेत्रीय आय पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस घोषणा के बाद विवाद ने नया मोड़ लिया है, जहां विपक्ष ने आरोप लगाया था कि स्टेशन संख्या कम करने से रेलवे क्षेत्र की कमाई में गिरावट आएगी।

राजनीतिक विरोध के कारण इस मुद्दे पर संसद और विधानसभा स्तर पर भी चर्चा हुई। खासकर ओडिशा में विपक्षी पार्टियों ने सरकार की इस नीति के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था। उनका कहना था कि रेलवे स्टेशन कम होने से माल और यात्री ट्रैफिक प्रभावित होगा, जिससे आय में कमी आएगी, जिससे इलाके की विकास योजनाओं पर भी असर पड़ेगा।

वहीं रेलवे मंत्रालय ने मीडिया को जारी किए गए बयान में साफ कहा, “पूर्वी तटीय रेलवे क्षेत्र में रेलवे स्टेशन कम करना या सीमाएं घटाना, माल और यात्री यातायात के राजस्व पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा। यह कदम संचालन में सुधार और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए लिया गया है।”

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, हटाए गए या सीमित किए गए कुछ स्टेशनों पर यात्री और माल क्रियाकलाप अपेक्षाकृत कम थे, इसलिए इनके बंद होने से आर्थिक गतिविधियों में कोई खास कमी नहीं होगी। इसके अलावा, नई योजनाओं के तहत रेलवे ने इन क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने की भी योजना बनाई है।

अधिकारियों ने बताया कि रेलवे क्षेत्रीय और जोंनल कमाई के आंकड़ों में कोई गिरावट नजर नहीं आएगी, क्योंकि मुख्य ट्रंक रूट्स और बड़े स्टेशनों पर यातायात में बढ़ोतरी हो रही है। साथ ही, प्रशासनिक खर्चो में कटौती के माध्यम से लाभप्रदता बढ़ाने की कोशिशें भी इस कदम का हिस्सा हैं।

इस मामले पर रेल मंत्री ने कहा है कि यह प्रक्रिया संवेदनशील तरीके से लागू की जा रही है और क्षेत्रीय विकास को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष को आश्वासन दिया कि रेलवे के हितों और आम जनता की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रेलवे के इस निर्णय से ऑपरेशनल दक्षता बढ़ेगी, लेकिन विपक्षी दबाव के कारण सरकार को इस मुद्दे पर अधिक संवाद और समझौते की आवश्यकता होगी।

इस विवादास्पद विषय पर अभी और चर्चाएं जारी हैं और आने वाले समय में रेलवे विभाग से और अपडेट मिलने की संभावना है।

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