पेट्रोलियम सचिव ने राज्य मुख्य सचिवों से की मुलाकात, ऑटो LPG और प्रवासी मजदूरों को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली: पेट्रोलियम सचिव ने हाल ही में विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिवों से एक अहम बैठक की। इस दौरान उन्होंने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और प्रवासी मजदूरों के मुद्दों पर चर्चा की। सचिव ने खासतौर से 5 किलो एफटीएल (फ्लाइंग टर्मल लिक्विड) सिलेंडर के लक्षित वितरण […]

नई दिल्ली: पेट्रोलियम सचिव ने हाल ही में विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिवों से एक अहम बैठक की। इस दौरान उन्होंने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और प्रवासी मजदूरों के मुद्दों पर चर्चा की। सचिव ने खासतौर से 5 किलो एफटीएल (फ्लाइंग टर्मल लिक्विड) सिलेंडर के लक्षित वितरण पर जोर दिया और साथ ही ऐसे ऑटोमोबाइलों की जरूरत पर प्रकाश डाला जो पेट्रोल और एलपीजी दोनों ईंधन पर चल सकें।

पेट्रोलियम विभाग ने राज्यों से अनुरोध किया कि वे एलपीजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए अपने स्तर पर उचित रणनीति अपनाएं जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही ईंधन की बचत भी हो सके। उन्होंने कहा कि 5 किलो का एफटीएल सिलेंडर बेहद सुरक्षित और उपयोगी विकल्प है, खासकर छोटे परिवारों और प्रवासी मजदूरों के लिए, जिन्हें गैस सिलेंडर की आपूर्ति में अधिक सुविधा मिलेगी।

साथ ही, पेट्रोलियम सचिव ने इस अवसर पर चर्चा की कि दो-ईंधन वाले ऑटोमोटिव वाहन न केवल प्रदूषण कम करेंगे बल्कि ईंधन की लागत को भी नियंत्रित करेंगे। उन्होंने राज्यों को सुझाव दिया कि वे इस दिशा में सहयोग करें और ऐसी टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहित करें जो पेट्रोल और एलपीजी दोनों ईंधन का समुचित उपयोग कर सके।

प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर भी विशेष ध्यान देते हुए सचिव ने कहा कि महामारी और लॉकडाउन के दौरान इस वर्ग को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। सरकार इस दिशा में विभिन्न उपाय कर रही है ताकि इन्हें उचित स्वास्थ्य, सुरक्षा और ईंधन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रमुख सचिवों ने अपने सुझाव और राज्यों में हो रही प्रगति के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कई राज्यों में एलपीजी आधारित ऑटोमोटिव स्कीम लागू की जा चुकी हैं और सकारात्मक नतीजे भी सामने आ रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य न केवल प्रदूषण नियंत्रण और ऊर्जा संरक्षण है बल्कि इसका लक्षित वितरण मॉडल आर्थिक रूप से कमजोर और विशेष वर्गों तक सुविधाएं पहुंचाने का भी है। पेट्रोलियम सचिव ने राज्य सरकारों से सहयोग की अपील की, जिससे इस योजना को सफल बनाया जा सके और देश भर में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिल सके।

कुल मिलाकर, यह बैठक ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी जो पर्यावरण, आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से बेहद लाभकारी होगी। एलपीजी के विस्तार और प्रवासी मजदूरों की बेहतर देखभाल के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहयोग की जरूरत पर ज़ोर दिया गया।

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