बांग्लादेश के विदेश मंत्री के दौरे में गंगा जल साझा करना, वीजा और ऊर्जा सहयोग होंगे मुख्य विषय
नई दिल्ली, 27 मार्च: बांग्लादेश के विदेश मंत्री की भारत यात्रा संभवत: 7 और 8 अप्रैल को होगी। यह पहली बार होगा जब हसीना सरकार के पतन के बाद कोई बांग्लादेशी विदेश मंत्री भारत का दौरा करेगा। क्षेत्रीय सहयोग के इस नए अध्याय के तहत, गंगा जल साझा करने के समझौते का नवीनीकरण, वीजा मामलों पर बातचीत और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के अवसर महत्वपूर्ण एजेन्डा होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल ही में सत्ता में आई गठबंधन की नई सरकार, विशेषकर नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), गंगा जल साझा करने के समझौते को लेकर अधिक बातचीत के पक्ष में दिखाई देती है, जो कि पूर्व अंतरिम सरकार की तुलना में अधिक सहमतिपूर्ण रुख का संकेत देती है। समुद्री सीमा, व्यापार और आव्रजन जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श संभव है।
इस दौरे की प्रमुखता इसी में है कि यह द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरु करने और तकनीकी, जल, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर होगा। भारत-बांग्लादेश के बीच दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी को मजबूत करने का यह अवसर माना जा रहा है।
गंगा जल साझा करने का मुद्दा वर्षों से दोनों देशों के बीच संवेदनशील रहा है। पिछले समझौते की अवधि समाप्ति के करीब है, जिससे इस यात्रा की अहमियत और बढ़ जाती है। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की योजना के तहत, बिजली आयात-निर्यात और नवीनीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर भी चर्चा संभव है।
इसके अलावा, वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने, आव्रजन नियमों में सुधार करने और व्यापार को सुगम बनाने के लिए भी पहल हो सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच विश्वास और साझेदारी के नए द्वार खुल सकते हैं, जो दक्षिण एशियाई क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी, बल्कि क्षेत्रीय शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और आर्थिक विकास को भी मजबूती प्रदान करेगी।
