संयुक्त राष्ट्र ने दक्षिण सूडान में महत्वपूर्ण कॉरिडोर खोलने में भारतीय शांति बलों के प्रयासों की प्रशंसा की
जनवरी 2026 तक, भारत संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण सूडान मिशन (UNMISS) में सबसे अधिक सैनिक योगदान देने वाला देश था, जहां 1,779 भारतीय शांति सैनिक तैनात थे।
संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में दक्षिण सूडान में एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर खोलने में भारतीय शांति सैनिकों की सराहना की है। यह कॉरिडोर क्षेत्रीय संपर्क को सशक्त करता है और जनसंख्या के लिए सुरक्षा और संचार के नए रास्ते खोलता है। भारतीय शांति सैनिकों द्वारा किए गए प्रयासों ने संप्रगामी मामलों को कम किया है और स्थानीय लोगों के लिए स्थिरता से जुड़ी उम्मीदें बढ़ाई हैं।
दक्षिण सूडान के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भारतीय शांति सैनिकों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया है। कठोर जलवायु, अडचनभरे इलाके और कभी-कभी हिंसक माहौल के बावजूद, वे नागरिकों की सुरक्षा, बुनियादी सेवाओं की पहुंच और क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध रहे।
UNMISS के अधिकारियों ने भी इस उपलब्धि की पुष्टि की है और कहा है कि भारतीय टुकड़ी ने मिशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय सेनाओं ने स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाया है, जिससे हिंसात्मक घटनाओं में कमी आई है।
भारत की यह भूमिका न केवल शांति स्थापना में बल्कि क्षेत्रीय विकास में भी मददगार साबित हुई है। संयुक्त राष्ट्र की प्रशंसा से भारत की वैश्विक छवि मजबूत हुई है और देश की सैन्य क्षमताओं को भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है।
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की यह प्रतिबद्धता दिखाती है कि वह विश्व शांति के लिए सक्रिय एवं जिम्मेदार भागीदार है। दक्षिण सूडान मिशन में भारतीय योगदान ने शांति प्रक्रिया को सुदृढ़ किया है और वहां स्थिरता के लिए एक नई उम्मीद जगाई है।
