यमन के हूती विद्रोहियों ने ईरान में जंग के बीच अपने हमले तेज कर दिए हैं। लाल सागर में जहाजों पर होते हमलों ने न केवल वैश्विक व्यापार की कमर तोड़ दी है, बल्कि मिडिल ईस्ट में एक नए युद्ध का खतरा भी पैदा कर दिया है।

ईरान के समर्थन वाले इस समूह ने इजरायल-हमास युद्ध के बीच जिस तरह से मोर्चा खोला है, उसने अमेरिका सहित उसके सहयोगी देश असहज हो गए हैं।

कौन हैं हूती?

हूती मूल रूप से यमन के उत्तरी हिस्से का एक सैन्य, राजनीतिक और धार्मिक संगठन है। इस समूह का नेतृत्व ‘हूती परिवार’ करता है, जिसके नाम पर ही इन्हें ‘हूती’ कहा जाता है। धार्मिक रूप से ये इस्लाम के ‘जैदी शिया’ संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं। 2011 में हुई ‘अरब क्रांति’ के बाद जब यमन में अस्थिरता बढ़ी, तब हूतियों ने अपनी ताकत का विस्तार किया और देश के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया।

शुरुआती दौर में यह समूह यमन की सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ता था, लेकिन समय के साथ इन्होंने अपनी सैन्य क्षमता को कई गुना बढ़ा लिया। हूतियों के मजबूत होने के पीछे ईरान का बड़ा हाथ माना जाता है। आज ये सिर्फ एक विद्रोही गुट नहीं, बल्कि एक ऐसी ताकत बन चुके हैं जिनके पास आधुनिक ड्रोन और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें मौजूद हैं।

लाल सागर में मचाया कोहराम

7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले के बाद, जब इजरायल ने गाजा में सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो हूतियों ने फिलिस्तीनियों के समर्थन में उतरने का एलान कर दिया। उन्होंने लाल सागर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हूतियों का तर्क है कि वे केवल उन्हीं जहाजों पर हमला कर रहे हैं जिनका संबंध इजरायल से है, हालांकि इस वजह से वैश्विक व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

इन हमलों का जवाब देने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने हूतियों के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक भी की है। बावजूद इसके, हूतियों के तेवर कम नहीं हुए हैं। वे लगातार इजरायल की ओर ड्रोन और मिसाइलें दाग रहे हैं। यह स्थिति इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि लाल सागर दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक है और यहां होने वाली कोई भी गड़बड़ी पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ा सकती है।

युद्ध में सीधी एंट्री पर अब तक सस्पेंस

हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने बार-बार कहा है कि उनके हाथ ‘ट्रिगर’ पर हैं और वे किसी भी वक्त बड़ा हमला करने के लिए तैयार हैं। दिलचस्प बात यह है कि लेबनान के हिजबुल्लाह या इराक के सशस्त्र समूहों की तरह हूतियों ने अभी तक औपचारिक रूप से युद्ध में शामिल होने का आधिकारिक एलान नहीं किया है। वे फिलहाल ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपना रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हूती ईरान के साथ तालमेल बिठाकर सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं ताकि इजरायल और उसके सहयोगियों पर अधिकतम दबाव बनाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर लाल सागर का इस्तेमाल ईरान (इस्लामिक रिपब्लिक) के खिलाफ हमले के लिए किया गया या किसी और देश ने इस युद्ध में अमेरिका का साथ दिया, तो वे अपनी कार्रवाई को और तेज कर देंगे।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता संकट

हूतियों की सक्रियता केवल इजरायल के लिए ही नहीं, बल्कि पड़ोसी खाड़ी देशों (Gulf countries) के लिए भी बड़ा सिरदर्द है। उनके पास ऐसी मारक क्षमता है जो अरब प्रायद्वीप के चारों ओर समुद्री यातायात को ठप कर सकती है। अगर हूतियों की ओर से संघर्ष बढ़ता है, तो स्वेज नहर से लेकर ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) तक व्यापारिक मार्ग पूरी तरह बंद होने की नौबत आ सकती है।

दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं पहले से ही सप्लाई चेन की समस्याओं से जूझ रही हैं। ऐसे में अगर अरब प्रायद्वीप के समुद्री रास्तों पर ताला लगता है, तो तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। यही कारण है कि हूतियों की हर हरकत पर आज पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है, क्योंकि उनके एक गलत कदम का असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा।