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दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, फैल रहा है गलतफहमी: शाह

Manmahesh

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर से दक्षिणी राज्यों से लोकसभा में सीटों की संख्या कम होने को लेकर चल रही गलतफहमी परस्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि ‘‘दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को घटाने’’ को लेकर एक बड़ा नरेटिव तैयार किया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है।

अमित शाह ने कहा कि देश में संविधान के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया होती है और इसमें प्रत्येक क्षेत्र का जनसंख्या के अनुसार न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई भी राज्य विशेष के विरुद्ध, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के विरुद्ध, नहीं है।

गृह मंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने इस बारे में पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया है। जो भी कदम उठाए गए हैं, वे देश के संविधान और कानून के अनुरूप हैं। ऐसी अफवाहें फैलाना कि दक्षिणी राज्यों के सीटें कम होंगी, पूरी तरह से एक गलतफहमी है। यह भ्रम केवल राजनीतिक प्रयोजन के लिए फैला रहा है।’’

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश के सभी राज्यों को उतना ही प्रतिनिधित्व मिलेगा जितना उनके जनसंख्या के अनुसार उचित होगा। ‘‘लोकतंत्र में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व का सिद्धांत सर्वोपरि है। किसी को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि किसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कम किया जाएगा।’’ अमित शाह ने कहा।

वहीं, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दक्षिणी राज्यों में यह प्रश्न इसलिए ज्यादा उठाया गया क्योंकि वहाँ की राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे को लेकर असंतोष व्यक्त कर रही हैं। अमित शाह की इस स्पष्टीकरण से संभावना है कि आगामी चुनावों में यह विषय अधिक उछल-उछलकर सामने न आए।

साथ ही, उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मीडिया रिपोर्ट्स को सत्यापित करें और किसी भी तरह की अफवाहों से बचें। सरकार देश की एकता और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

समापन में अमित शाह ने कहा, ‘‘जनता को भ्रमित करने वाले इन नरेटिव्स से सावधान रहें। हमारी प्राथमिकता है सभी नागरिकों को न्याय और बराबरी का प्रतिनिधित्व मिले।’’ यह स्पष्ट बयान किसी भी प्रकार की गलतफहमी को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में, चुनाव आयोग और गृह मंत्रालय ने चुनाव क्षेत्र के परिसीमन को लेकर अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने की बात कही है, ताकि देश में लोकतंत्र की नींव मजबूत हो।

अतः दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को लेकर चल रही अटकलें बेबुनियाद हैं और गृह मंत्री की यह प्रतिक्रिया इसे पूरी तरह से खारिज करती है।

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