हिमाचल विधानसभा चुनाव 2022 : बंजार के तीन प्रत्याशियों के बारे में रोचक बातें

हिमाचल विधानसभा चुनाव 2022 : बंजार के तीन प्रत्याशियों के बारे में रोचक बातें

हिमाचल विधानसभा चुनाव 2022 : बंजार के तीन प्रत्याशियों के बारे में रोचक बातें

डलहौज़ी हलचल (कुल्लू) विभूति चौधरी: बंजार विधानसभा चुनाव क्षेत्र के सियासी दंगल के तीन प्रत्याशी के बारे में रोचक तथ्य यह है इन तीनों ने जिला परिषद में बगावत कर राजनीतिक मुकाम हासिल किया है। विधानसभा चुनाव से तीनों भाजपा में थे।

बंजार विधानसभा चुनाव से कांग्रेस के खीमीराम शर्मा, भाजपा के सुरेंद्र शौरी और आजाद उम्मीदवार हितेश्वर सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत पंचायतीराज चुनाब में जिला परिषद सदस्य बनकर की है। भाजपा पृष्ठभूमि वाले इन तीनों ही उम्मीदवारों ने जिला परिषद के चुनाव में बगावत कर राजनीतिक मुकाम हासिल किया है। खीमीराम और सुरेंद्र शौरी एक-एक बार और हितेश्वर सिंह दो बार जिला परिषद कुल्लू के सदस्य रह चुके हैं। साथ ही सुरेंद्र शौरी की धर्मपत्नी किर्ती शौरी एक बार जिप सदस्य रह चुकी है जबकि हितेश्वर सिंह की धर्मपत्नी विभा सिंह वर्तमान में धाउगी वार्ड से जिप सदस्य है।

 खीमीराम शर्मा अपने अपने दम पर बने थे जिला परिषद अध्यक्ष

वर्ष 2000 के पंचायतीराज चुनाब में वर्तमान के कांग्रेस प्रत्याशी खीमीराम शर्मा को रैला वार्ड से भाजपा का समर्थन मिला था। चुनाब में वह रिकार्ड दस हजार मतों से जीतकर जिला परिषद के सदस्य बने। लेकिन जब अध्यक्ष के चुनाब की बात आई तो पार्टी ने हाथ पीछे कर लिए। तमाम उठापठक के बाद खीमीराम ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लडने का फैसला लिया और बडी जोडतोड कर जीत हासिल कर जिला परिषद कुल्लू के अध्यक्ष बने। वर्ष 2003 में उनको बंजार से भाजपा का टिकट मिला और जीत प्राप्त कर विधायक बने। इसके बाद खीमीराम शर्मा की राजनीति बुलंदियों पर रही। विधायक से लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और मंत्री रहे। इस बार उन्हे भाजपा छोडकर कांग्रेस का टिकट मिला है।

 सुरेन्द्र शौरी कर चुके हैं भाजपा से खिलाफत

निवर्तमान भाजपा के प्रत्याशी सुरेंद्र शौरी के राजनीतिक सफर का आगाज भी जिला परिषद से हुआ है। 2010 के पंचायतीराज चुनाब में उन्होने चैहणी वार्ड से भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ अपनी धर्मपत्नी किर्ती शौरी को चुनावी मैदान में उतारा। किर्ती यह चुनाव जीती और सुरेन्द्र शौरी की राजनीतिक जमीन को मजबूती मिली। इसके बाद 2015 में सुरेंद्र शौरी भी पार्टी से बगावत कर इसी वार्ड से आजाद प्रत्याशी के तौर पर जिला परिषद का चुनाव लडकर जीत हासिल की। भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हे खीमीराम शर्मा का टिकट काटकर पार्टी प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में सुरेन्द्र शौरी जीते और 2022 में भी पार्टी ने उन पर ही भरोसा रखते हुए उम्मीदवार बनाया है।

 पार्टी ने नही सूनी तो हितेश्वर ने दिखाया दम

कुल्लू राजघराने से संबध रखने वाले हितेश्वर सिंह की राजनीति का रास्ता भी जिला परिषद होकर ही गुजरा है। वह 2010 और 2015 के पंचायतीराज चुनाव में लगातार दो बार रैला वार्ड से आजाद प्रत्याशी के तौर पर जिला परिषद के सदस्य चुने गए। दोनों चुनाव उन्होने रिर्काड मतों से जीते और अपनी राजनीतिक परिपक्कता का परिचय दिया। 2020 के चुनाव में उन्होने अपनी धर्मपत्नी विभा सिंह को धाउगी वार्ड से आजाद उतारा। विभा भी यहां से भारी मतों से चुनाब जीतकर जिला परिषद की सदस्य बनी। हितेश्वर सिंह जनता के बीच मजबूत पकड के कारण इस बार भाजपा से टिकट के प्रबल दाबेदार थे। लेकिन टिकट न मिलने की स्थिती में वह आजाद प्रत्याशी बनकर चुनाबी मैदान में उतरे हैं। बहरहाल, जिला परिषद के चुनाब में बगावती तेवर दिखा चुके तीनों प्रत्याशी इस बार के चुनाब में आमने सामने हैं और तीनों के बीच रोचक मुकाबला माना जा रहा है।