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डलहौजी का नाम बदलने से अच्छा है कि अपनी सोच बदलो : अधिवक्ता अरुण
 

डलहौज़ी हलचल (चंबा) : कोविड-9 के चलते एक ओर जहां पूरा देश कोरोना महामारी से लड़ रहा है, वहीं नेताओं द्वारा स्थानों के नाम बदलने पर जोर दिया जा रहा है। चाइल्ड बैल्फेयर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं अधिवक्ता अरुण शर्मा ने कहा कि राज्यसभा सदस्य सुब्रामण्यम स्वामी ने सी.एम. को पत्र लिखकर डल्हौजी का नाम बदलकर सुभाष नगर रखने की सिफारिश को है। उनका यह विचार उचित नहीं है ।

पर्यटन नगरी डल्हौजी विश्व में अपने नाम से प्रसिद्ध है। देश-विदेश के पर्यटक वाकिफ हैं। नाम बदलने से टूरिज्म कारोबार में हानि होगी। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से अच्छा है कि अपनी सोच बदलो । ब्रिटिश गुलामी का प्रतीक नहीं सिर्फ हमारी सोच है। डलहौज़ी का नाम लॉर्ड डल्हौजी से जुड़ा है, जोकि ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि शिमला समझौता की तरह डलहौज़ी समझौता भी हुआ था। यह भी ऐतिहासिक है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में covid महामारी से निपटना है । उन्होंने सरकारसे अपील की है कि इस तरह के मामले में किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले एक बार स्थानीय बाशिंदों को राय अवश्य ली जाए। सिर्फ नेताओं के कहने पर किसी भी निष्कर्ष तक न पहुंचें बल्कि लोग क्या चाहते हैं, उसी के अनुसार फैसला लिया जाए।

उन्होंने कहा कि वैसे तो अंग्रेजी भी ब्रिटिश गुलामी का प्रतीक है। ऐसी स्थिति में क्या अंग्रेजी बोलना बंद कर दें। उन्होंने बताया कि नाम बदलने से क्या होगा, अपनी सोच बदलो, उसी में ही विकास है।