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देवभूमि में संस्कृति के प्रचार-प्रसार और आपसी सौहार्द को सुदृढ़ करने का माध्यम मेले - सुखराम चौधरी
देवभूमि में संस्कृति के प्रचार-प्रसार और आपसी सौहार्द को सुदृढ़ करने का माध्यम मेले - सुखराम चौधरी
 
डलहौज़ी हलचल (सोलन) : ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने राज्य स्तरीय सायर मेले की दूसरी सांस्कृतिक संध्या पर लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेले एवं त्योहार हमारी संस्कृति के द्योतक हैं तथा इस प्रकार के आयोजन हमारे प्राचीन मूल्यों एवं संस्कृति को भावी पीढ़ी के लिए सहेजकर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रदेश सरकार का प्रयास है कि राज्य में आयोजित होने वाले मेलों और उत्सवों का और बेहतर ढंग से आयोजन हो ताकि इनके माध्यम से हमारे समृद्ध संस्कृति एवं परम्पराओं का व्यापक प्रचार-प्रसार और संरक्षण हो सके।

उन्होंने कहा कि मेले के आयोजनों में न केवल क्षेत्र विशेष अपितु आस-पास के बड़े सम्भाग की भागीदारी होती है। यह आयोजन जहां आमजन के मेलजोल का कारण बनते हैं वहीं देवभूमि में संस्कृति के प्रचार-प्रसार और आपसी सौहार्द को सुदृढ़ करने का माध्यम भी बनते हैं। इस मेले के आयोजन की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि सायर मेले को प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय घोषित किया है जिससे क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि लोगों का जीवन सरल बनाने के लिए प्रत्येक परिवार के लिए प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में 125 यूनिट बिजली निःशुल्क की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना, हिम केयर योजना, सहारा योजना, मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना आदि कल्याणकारी योजनाएं गरीबो के उत्थान के लिए आरम्भ की गई है। इसके अतिरिक्त महिलाओं के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम की साधारण बसों में 50 प्रतिशत किराया किया गया है।

मेले के दूसरे दिन पुरुष पहलवानों की कुश्तियां का आयोजन हुआ जिसमें नामी पहलवानों ने भाग लिया।

  इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री ने अपनी ऐच्छिक निधि से मेला समिति को  21 हजार रुपए देने की भी घोषणा की।

इस अवसर पर अर्की के पूर्व विधायक गोविन्द राम शर्मा, ज़िला परिषद सदस्य आशा परिहार, हीरा कौशल, अमर सिंह ठाकुर, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रत्न सिंह पाल, नगर पंचायत के अध्यक्ष हेमेन्द्र गुप्ता, उपायुक्त सोलन कृतिका कुलहरी, पुलिस अधीक्षक सोलन वीरेंद्र शर्मा, उपमण्डलाधिकारी अर्की केवल राम, सहित मेला समिति के सरकारी व गैर सरकारी सदस्य तथा पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।