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भारतवासियों का विश्व पटल पर डंका - नीतिन मेहता
भारतवासियों का विश्व पटल पर डंका - नीतिन मेहता
 
डलहौज़ी हलचल (दिल्ली) : ब्रिटिश प्रधानमन्त्री  के पद की दौड़ भारतीय मूल के ऋषि सुनक की मजबूत दाबेदारी से एक बार फिर भारत वासियों  का विश्व पटल पर प्रभुत्व  सामने आया है । ऋषि सुनक के माता पिता केन्या के नागरिक थे जोकि मूलतः भारत से जा कर केन्या बस  गए थे इसलिए  ऋषि सुनक  को सच्चे अर्थों में भारतवासी माना जा सकता है।

भारत वासियों  के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होना महज इंग्लैंड तक ही सीमित नहीं है बल्कि पिछले कुछ सालों के दौरान  पुरे विश्व के 15 देशों में  200 भारत वासियों  अपनी  मेहनत और समर्पण की बजह से   राजनीती , समाज सेवा आदि अनेक क्षेत्रों में ऊँचे प्रतिष्ठित पदों को सुशोभित किया है । भारत मूल की लिसा सिंह पहली अप्रबासी महिला थी जोकि ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया प्रान्त में सीनेटर चुनी गयी । उसके पूर्वज पश्चिम बंगाल से चीनी  के  फार्म में नौकरी के लिए फिजी आए थे । लिसा सिंह वर्तमान में मेलबोर्न आधारित ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टिट्यूट में निदेशक हैं । लिसा सिंह  ने  ऑस्ट्रेलिया ,भारत ,जापान , अमेरिका के बीच  सामरिक महत्वों के बिषयों पर  इंडो --पैसिफ़िक  क्षेत्र की सुरक्षा  के लिए  गठित "क्वाड" (QUAD )  में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की ।

भारतीय मूल के सर आनन्द सत्यानन्द बर्ष 2006 से वर्ष 2011 तक न्यूज़ीलैंड के 19वें गवर्नर-जनरल  रहे । उन्होंने  एक सफल वकील , जज और लोकपाल  की भूमिका भी अदा की । उनके पूर्वज बर्ष 1911 में गन्ने की खेती के लिए फिजी आये जहां से वह  न्यूज़ीलैंड चले गए ।सर आनन्द सत्यानन्द का कहना है की भारतवासी लगभग दो सौ साल पहले न्यूज़ीलैंड आये थे लेकिन वह  अब तक भी दो सौ साल से अपने साथ लाई   भारतीय  सांस्कृति और परम्पराओं को सहेज कर रखे हैं ।  समृद्ध देश कनाडा में अनेक भारतियों ने सामाजिक आर्थिक क्षेत्रों में ऊँची छलांग लगाई है  जिसमे से भारतीय मूल की राजनेता  अनीता आनन्द  राष्ट्रीय रक्षा मन्त्री के पद पर आसीन हुई । फिजी की 38 % जनसंख्या भारत मूल की है जोकि ब्रिटिश काल में चीनी मीलों में मुख्यता नौकरी करने के मकसद से फिजी पहुंचे थें । भारतीय मूल के महिंदर चौधरी अनेक प्रतिष्ठित पदों को सुशोभित करने के बाद फिजी के पहले भारतीय मूल के प्रधान मन्त्री बन गए । फिजी की राजनीती में भारत बंसियो की अच्छी पकड़ और धाक मानी जाती है ।

गुयाना गणराज्य में 40 प्रतिशत जनसंख्या भारत मूल  की है और  देश के उप राष्ट्रपति भारत जगदेओ भारत वासी हैं । उनके अलावा भी अनेक प्रवासी भारतीय गुयाना की राजनीति में ऊँचे पदों पर विराजमान हैं । त्रिनिदाद और टोबैगो की कुल जनसंख्या में 37 प्रतिशत  भारतीय मूल की जनसंख्या है और कमला प्रसाद बिसेसर  वर्ष 2010  से वर्ष  2015 तक  देश के प्रधानमंत्री  रहे । सूरीनाम में भारत वासियों  की संख्या कुल जनसंख्या का  लगभग 27 . 4 प्रतिशत  है और वह  देश में सबसे बड़ा  नस्ली समूह है । भारतीय मूल के प्रताप राधकृष्ण देश के प्रधान मन्त्री  और चान संतोखी देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं ।

अनेक भारत वासी मॉरिशस में प्रधान मन्त्री । राष्ट्रपति और अन्य ऊँचे पदों पर बिराजमान रहे हैं मॉरिशस की राजनीती में भारतबांसियों का लम्बे समय से दबदबा  है । भारत वासी सूरकडो  मॉरिशस  की आज़ादी के आन्दोलन के जन नायक माने जाते हैं ।  भारतीय मूल में वैवेल  रामकलावन  बर्ष 2020 से  सेशेल्स के राष्ट्रपति  के पद पर आसीन है । भारतीय मूल के परवीन जमनादास गोरधन  दक्षिण अफ्रीका  में कैबिनेट मन्त्री के पद पर रहे । वह  बर्ष 2009 से बर्ष2014 तक देश के बित मन्त्री , बर्ष 2015 से बर्ष 2017 तक देश के सहकारिता मन्त्री तथा फरबरी 2018 से पब्लिक एंटरप्राइज के मन्त्री हैं ।

पूर्बी अफ्रीकी देशों केन्या ,यूगांडा और तंज़ानिया में भारतीय समुदाय समाज के हर क्षेत्र में अपना प्रभुत्व रखता है।। भारतीय मूल के बिद्वान और संबिधान बिषेषज्ञ यश पाल गुलाटी ने लगभग बीस देशों के संबिधान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है । वह  केन्या के संबिधान समीक्षा समिति के अध्यक्ष भी रहे।  अमेरिका के राष्ट्रपति श्री जोए बिडेन ने भारतीय मूल के 17  नागरिकों को अमेरिकी प्रशासन  में महत्वपूर्ण अहोदों पर तैनात किया है जिसमे उपराष्ट्रपति कमला हैर्रिस भी  शामिल है  । विनय रेड्डी राष्ट्रपति के भाषण लेखन के निदेशक हैं।  

.इसके अलाबा भारत वासी अनेक देशों में राजदूत , हाई कमिश्नर के पदों पर कार्यरत है जिसमे से कनाडा के भारत में राजदूत नादिर पटेल भी शामिल हैं । भारत वासियों  ने पुरे विश्व में अपनी मेहनत , समर्पण , लगन के बल पर  राजनैतिक , सामाजिक , शिक्षा , स्वास्थ्य सहित अनेक क्षेत्रों में अथाह योगदान देकर  देश बसियों का मान सम्मान बढ़ाया है जिससे पुरे विश्व में भारतीयों को इज्जत और सम्मान की नज़र से देखा जाता हैं ।  लेखक नीतिन मेहता लंदन में आधारित इंडियन वेजीटेरियन सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष हैं और पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक हैं।