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जनसाधारण की भाषा में चेतना एवं जनजागरण का संदेश देने वाले पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम का स्वाधीनता आंदोलन में था प्रमुख योगदान
जनसाधारण की भाषा में चेतना एवं जनजागरण का संदेश देने वाले पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम का स्वाधीनता आंदोलन में था प्रमुख योगदान
 
डलहौज़ी हलचल (शिमला) : हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा सोमवार को हिमाचल दन्त महाविद्यालय सुन्दरनगर के सभागार में पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम राज्यस्तरीय जयन्ती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में सेवानिवृत्त अतिरिक्त उपायुक्त दर्शन कालिया एवं पूर्वप्राचार्य तथा प्रशासनिक अधिकारी दन्त महाविद्यालय डॉ अशोक शर्मा ने की। समारोह के प्रथम सत्र में डॉ हेमेन्द्र बाली ने पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम का स्वाधीनता आंदोलन में योगदान विषय पर विस्तृत शोध-पत्र प्रस्तुत किया। अपने शोध-पत्र पर वाचन करते हुए कहा कि पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम भारत के स्वतंत्रता सेनानी तथा क्रांतिकारी साहित्यकार थे। उन्होंने काव्य से सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्हें 'पहाड़ी गांधी' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने जनसाधारण की भाषा में चेतना का संदेश दिया।  बाबा कांशी राम की रचनाओं में जनजागरण की प्रमुख धाराओं के अतिरिक्त छुआछूत उन्मूलन, हरिजन प्रेम, धर्म के प्रति आस्था, विश्वबंधुत्व व मानव धर्म के दर्शन होते हैं। बाबा कांशी राम ने अंग्रेजी शासकों के विरुद्ध  अपने विद्रोही गीतों एवं कविताओं से अंग्रेज शासकों की नींव हिला दी थी । पहाड़ी गांधी ने इसके साथ आम जनता के दुख दर्द को भी कविताओं में व्यक्त किया गया। लाला लाजपतराय, हरदयाल सिंह, सरदार अजित सिंह, बरकतुल्लाह आदि क्रान्तिकारियों से प्रभावित होकर पहाड़ी गांधी बाबा कांशीराम ने स्वाधीनता आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। इसके साथ ही आगे जनरल जोरावर सिंह का स्वातंत्र्य संघर्ष में योगदान विषय सरदार पटेल विश्वविद्यालय मण्डी के सहायकाचार्य डॉ राकेश शर्मा ने शोध-पत्र प्रस्तुत किया। इसी विषय पर सार रूप में डॉ गंगाराम राजी ने भी अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। बाबा कांशीराम के स्वाधीनता आन्दोलन में योगदान पर हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों एवं लेखकों मदन हिमाचली, जगजीत आजाद, डॉ जयनारायण कश्यप, डॉ कृष्णमोहन पाण्डेयमुरारी शर्मा, डॉ सूरत ठाकुर, हितेंद्र शर्मा, श्यामानंद, दीपक शर्मा, प्रदीप गुप्ता आदि ने परिचर्चा की।

द्वितीय सत्र में कवि-सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बाबा कांशीराम के गांव से आये डॉ अमनदीप शर्मा ने उनके व्यक्तित्व पर "हिमाचले दी शान बाबा कांशीराम" गीत प्रस्तुत किया। रुपेश्वरी शर्मा, डॉ प्रशान्त आचार्य, आनन्द सोहर, प्रदीप गुप्ता, दीपक शर्मा, डॉ रवीन्द्र कुमार ठाकुर, सत्यपाल वशिष्ठ, उत्तमचंद शर्मा, डॉ पीसी कौंडल, पारुल अरोड़ा, सोमदत्त, किरण ठाकुर, चैतन्य गुप्ता, मुनीश तन्हा, रवीन्द्र दत्त जोशी , अनुशा जोशी, रवि जोशी, डॉ मनोज शैल, डॉ अमित शर्मा, राहुल देव, विचलित अजय, यादव कुमार शर्मा, पवना शर्मा, भूपेन्द्र जम्वाल, राजीव त्रिगर्ती, हरपिन्द्र कौर, अंकुश कुमार, जगदीश कपूर, कार्तिक शर्मा , दिनाक्षी, प्रकाश शर्मा, दिनेश गुप्ता, कृष्णा ठाकुर, किरण गुलेरिया, हरिप्रिया, निर्मला चन्देल, प्रियवंदा, पवन चौहान, हीरा सिंह कौशल, विनोद गुलेरिया, दक्षा शर्मा, हितेन्द्र शर्मा, दक्ष सुरेश चन्द शुक्ला, रवि कुमार सांख्यायन, आशा पठानिया, अशोक दर्द, डॉ शबनम ठाकुर आदि साहित्यकारों ने भी अपने उद्गार गीत एवं कविताएं प्रस्तुत की। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के सचिव डॉ कर्म सिंह ने उपस्थित अतिथियों एवं साहित्यकारों तथा कवियों का अभिनन्दन किया।