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सरकारी भूमि पर 49 कब्जे नियमित करने के आरोप में तहसीलदार निलंबित
सरकारी भूमि पर 49 कब्जे नियमित करने के आरोप में तहसीलदार निलंबित
 
डलहौज़ी हलचल (मंडी) : सरकारी भूमि पर अवैध रूप से 49 कब्जों को नियमित करने के आरोप में तहसीलदार को निलंबित किया गया है। आरोपित तहसीलदार अमर सिंह का मुख्यालय मंडी के मंडलायुक्त कार्यालय में होगा। वह मंडलायुक्त की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। मंडी जिला के बलद्वाड़ा में तैनात आरोपी तहसीलदार 30 जुलाई को सेवानिवृत्त हो जाएगा। हालांकि, विभागीय जांच जारी रहेगी। आदेशों में यह भी कहा गया है कि तहसीलदार ने राज्य के हितों को दरकिनार कर कब्जा करने वालों को फायदा पहुंचाया है। किसी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया है। लिहाजा, तहसीलदार के खिलाफ सेवानिवृत्ति के बाद भी विभागीय जांच जारी रहेगी ताकि इसके खिलाफ अगली कार्रवाई की जा सके।

राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ओंकार शर्मा ने बताया कि आरोपित तहसीलदार ने अतिक्रमण करने वाले लोगों के नाम जमीन का इंतकाल किया है। मंडी के उपायुक्त की रिपोर्ट में कहा है कि तहसीलदार ने अतिक्रमण के मामलों का निपटारा करते हुए उनमें इंस्टीट््यूशन नंबर नहीं डाले। केवल 14 मामलों को ही इंस्टीट््यूशन इंक्रोचमेंट रजिस्टर (दर्ज कब्जे) में दर्ज किया। अतिक्रमण के मामलों का इंतकाल डिक्री (जमीन के मामले में राजस्व विभाग का अंतिम आदेश) के आधार पर किया गया।

उपायुक्त ने रिपोर्ट में तहसीलदार के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवाएं (आचरण) नियमावली के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा है कि तहसीलदार ने अतिक्रमण के मामलों का निपटारा करते समय मात्र 14 मामलों को ही इंस्टीट््यूशन इंक्रोचमेंट रजिस्टर में दर्ज किया। अतिक्रमण के अधिकतर मामलों का इंतकाल डिक्री के आधार पर किया। इंक्रोचमेंट इंस्टीट््यूशन रजिस्टर में अंतिम नंबर 42/2022 है। मगर तहसीलदार ने 285/2022, 714/2022, 1030/2506, 2526/2022, 447/2022, 1047/2022, 87/2022, 916/2022, 613/2022, 745/2022, 1598/2021, 107/2021 और 646/2022 इंतकाल में दर्ज किए हैं। जाहिर है कि ये तमाम नंबर फर्जी हैं। इससे साफ है कि तहसीलदार ने गैर जिम्मेदाराना तरीके से कार्य किया।

उल्लेखनीय है कि बीते शुक्रवार को मंडी उपायुक्त के पास एक कब्जे को अवैध रूप से नियमित करने की शिकायत आई थी। जांच की गई तो शिकायत सही पाई गई। ऐसे ही और मामले होने के शक पर जब कार्यालय के पूरे रिकॉर्ड को खंगाला गया तो 49 कब्जों को अवैध रूप से नियमित करने का खुलासा हुआ।