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डलहौजी तेरी शान निराली
डलहौजी तेरी शान निराली 
 
डलहौज़ी हलचल (डलहौज़ी) :-  डलहौज़ी के मशहूर शिक्षण संस्तनों में शुमार गुरुनानक पब्लिक स्कूल डलहौज़ी में जहाँ बच्चे अच्छी शिक्षा ले रहे है तो वे अन्य गतिविधियों में भी भरपूर रूचि दिखा रहे है । इन गतिविधियों में स्वयं स्कूल के प्राचार्य नवदीप भंडारी और शिक्षक बच्चों को समय समय पर प्रेरित करते हुए नजर आते है । स्कूल के बच्चे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि खेल कूद और कविता पाठन जैसी गतिविधयों में अपना लोहा मनवा रहे है। स्कूल की नन्ही छात्रा शाविका ठाकुर ने डलहौज़ी की सुन्दरता को दर्शाती एक कविता लिखी है जोकि बच्चों के डलहौज़ी के प्रति लगाव को दर्शाती है । कविता का शीर्षक है "डलहौजी तेरी शान निराली"

"डलहौजी तेरी शान निराली"

डलहौजी तेरी शान निराली, ऊंचे पर्वत चारों और हरियाली ही हरियाली,

पर्यटकों के मन को भाती है, तभी तो यह निराली है,

दिसंबर जनवरी में पड़ती है यहां बर्फ, मानो रुई ही हुई हो हर तरफ,

गरम सड़क है माल रोड ,ठंडी सड़क में गाड़ियों की दौड़ ,

चर्च यहां के हैं मशहूर ,इसलिए लोग आते हैं यहां जरूर,

देवी देवताओं की भूमि है डलहौज़ी, खुशी-खुशी रहते हैं यहां फौजी,

सतधारा और पंचकूला तक हैं छोटे-छोटे मार्ग,

वहीं पर शहीद भगत सिंह के चाचा शहीद अजीत सिंह का है स्मारक,

डलहौजी तेरी शान निराली ,ऊंचे हैं पर्वत चारों और हरियाली ही हरियाली,

देवी देवताओं के मंदिर हैं यहां पर मशहूर,

लोग पहलवानी माता और भलाई माता मंदिर जाते हैं जरूर,

मिनी स्विटजरलैंड है डलहौजी में जाना जाता,

जो भी यहां एक बार आए वह वापस नहीं जाना चाहता,

अच्छे-अच्छे स्कूलों की है यहां पर भरमार,

दूसरे राज्यों से भी लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए रहते हैं तैयार

गांधी चौक और सुभाष चौक में होती है चहल-पहल,

जिससे छोटे बड़े सब का दिल जाता है बहल

देवदार के पेड़ों से घिरा है कालाटॉप, पर्यटक यहां पर आकर करते हैं मौज,

डलहौजी तेरी शान निराली , ऊंचे पर्वत चारों और हरियाली ही हरियाली

                                          शाविका ठाकुर

शाविका ठाकुर