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सुन्नी में सुरक्षित आरामदेह गौ सदन
 
डलहौज़ी हलचल (शिमला) जीएल महाजन  :- शिमला ज़िले के सुन्नी में 2.22 करोड़ रुपये की लागत से नब निर्मित  गौ सदन    प्राकृतिक बाताबरण में लावारिस पशुओं को आश्रय प्रदान करते हुए पेयजल, चारा, मेडिकल सुविधाएं आदि प्रदान करेगा।
आवारा पशुओं के सुरक्षित आरामदेह गौसदन का निर्माण हिमाचल प्रदेश गौ-सेवा आयोग द्वारा शिमला में 45 किलोमीटर दूर 35 बीघा भूमि पर किया गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार  राज्य  बर्फीले जनजातीय  लाहौल स्पीति जिले  को छोड़  कर बाकि सभी   11 जिलों में  गाय सदन अभ्यारण स्थापित करेगी ।  राज्य के जनजातीय जिले लाहौल स्पीति में कोई भी आवारा पशु दर्ज नहीं किया गया है । यह गौ सदन हिमाचल में छठा गौसदन  होगा ।

राज्य के पशु पालन मन्त्री वीरेन्द्र कँवर ने बताया की  अब तक कोटला बड़ोग (सिरमौर जिला ),हांडा कुण्डी (सोलन जिला ), खेड़ी (हमीरपुर जिला ) थाना कलां खास (ऊना जिला ),,लुथान  ज्वाला मुखी (काँगड़ा जिला )में   गाय सदन। अभ्यारण  स्थापित किये जा चुके हैं । इस गौ-सदन में 26 लाख रुपये प्रति गाय शैड की लागत से स्टील ढांचे के पांच गाय शैड कुल 1.30 करोड़ रुपये की लागत से बनाये गये हैं जिससे इस गौ सदन में 500 अतिरिक्त पशुधन को आश्रय प्रदान किया जाएगा। अभी इस गौ सदन में 200 गायें पाली जा रही हैं। राज्य का पशुपालन विभाग इस समय सुन्नी में गैर सरकारी संगठन के माध्यम से ‘‘हरी गौ सदन’’ का संचालन कर रहा है जिसमें 200 गायों को आश्रय प्रदान किया गया है तथा अतिरिक्त शैड।ढांचागत सुविधायें प्रदान कर इस क्षमता को बढ़ाकर अतिरिक्त पांच सौ गायों को आश्रय प्रदान किया गया है । गायों को हरा।सूख चारा चैबीस घण्टा सुनिश्चित करने के लिए 38.87 लाख रुपये लागत से स्टील ढांचे का चारा स्टोर स्थापित किया गया  है।

इस गौसदन को एक मॉडल स्थल के रुप में विकसित करके इसे पर्यटक स्थल के रुप में भी विकसित किया जा रहा है । इस गौसदन का उद्देश्य वन्य जीव अभ्यारण  की तर्ज पर विकसित करके इसे पहाड़ी गायों के संरक्षण एवं संवर्धन स्थल के रुप में विकसित करने का है। इस गौसदन का उद्देश्य देसी पहाड़ी ( गौरी ) साहीवाल , रेड सिंधी आदि देसी  गायों की नसल को संरक्षित करके अच्छी नसल के सांड भी तैयार करने का है ताकि क्षेत्र के लोगों को सेवाएं अर्पित की जा सकें। इस गौसदन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया है  तथा सरकारी संस्थान इसकी ऊर्जा, वॉटर पंपिंग की जरूरतों के लिए बायो गैस प्लांट स्थापित करने में मदद करेंगे। इस गौसदन के संचालन में अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए बायो-फर्टीलाइज़र तथा बायो पेस्टिसाइड तैयार करके स्थानीय किसानों को रियायती दरों पर बेचा जाएगा।

हिमाचल प्रदेश गौसेवा आयोग इस गौसदन के संचलान में प्रति गाय पांच सौ रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है । राज्य सरकार ने  ढांचा गत निर्माण में कार्यरत  बिभिन्न बिभागों जैसे  लोक निर्माण ,ग्रामीण विकास ,हाउसिंग बोर्ड आदि  बिभागों को  सम्बंधित जिलों में नोडल बिभाग घोषित कर दिया है । राज्य में इस समय सड़कों पर आबारा पशुओं की संख्या 27 ,352  आंकी गयी है जबकि 13 ,337 पशुओं को  गौ सदनों ,गौ शालाओं  में पाला जा रहा हैा। राज्य सरकार ने गौ सदनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने के लिए  सभी मन्दिर ट्रस्टों को अपनी आमदनी का 15 प्रतिशत हिस्सा देने के आदेश जारी किये हैं तथा राज्य सरकार गैर सरकारी संगठनों ,ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों को पी पी पी मॉडल पर गौ सदन चलाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है ।

सभी गाय सदन। अभ्यारण  की क्षमता सम्बंधित जिलों में भूमि की उपलब्धता के आधार पर तय की गई है  तथा   गौ सदनों । अभ्यरणों  को आर्थिक रूप से स्वावलंबी  बनाने के लिए  गाय गोबर ।मूत्र से बायोगैस प्लांट सहित अन्य उत्पाद बनाये जायेंगे जिससे  इन्हें अतिरिक्त आमदनी के साधन उपलब्ध करवाए जा सकें । गौ सदनों और अभ्यारण  में रहने वाले पशुओं को  मेडिकल सहित सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।