राजकीय महाविद्यालय भलेई बंद करने के फैसले पर भड़के ग्रामीण, विधायक डीएस ठाकुर ने भी जताया विरोध

भलेई कॉलेज बंद होने से 10 पंचायतों में रोष, ग्रामीण बोले- गरीब बच्चों की पढ़ाई का जिम्मेदार कौन?
राजकीय महाविद्यालय भलेई बंद करने के फैसले पर भड़के ग्रामीण, विधायक डीएस ठाकुर ने भी जताया विरोध

डलहौज़ी हलचल | चंबा

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कम छात्र संख्या वाले महाविद्यालयों के विलय एवं बंद करने के निर्णय के तहत राजकीय महाविद्यालय भलेई को बंद किए जाने की खबर के बाद क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। भलेई और आसपास की पंचायतों के ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों तथा जनप्रतिनिधियों ने इस फैसले को ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ बताया है।

ग्रामीणों ने उठाए शिक्षा के भविष्य पर सवाल

स्थानीय निवासी जर्म सिंह ने सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि भलेई जैसे दुर्गम क्षेत्र के अनेक परिवार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए चंबा, बनीखेत या अन्य शहरों में भेजने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में कॉलेज बंद होने से गरीब परिवारों के बच्चों, विशेषकर छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित होगी।

उन्होंने सरकार से पूछा कि जो विद्यार्थी आर्थिक कारणों से बाहर पढ़ने नहीं जा सकते, उनके लिए उच्च शिक्षा की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

विधायक डीएस ठाकुर ने सरकार को घेरा

डलहौज़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डी.एस. ठाकुर ने भी कॉलेज बंद करने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि भलेई जैसे भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दूरस्थ क्षेत्र में स्थित यह महाविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों और छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को कॉलेज बंद करने के बजाय यहां शिक्षकों और आधारभूत सुविधाओं को बढ़ाकर संस्थान को मजबूत करना चाहिए था। विधायक ने आरोप लगाया कि यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला है।

वर्ष 2017 में हुई थी कॉलेज की स्थापना

स्थानीय लोगों के अनुसार राजकीय महाविद्यालय भलेई की स्थापना वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से की गई थी।

कॉलेज भवन के लिए क्षेत्र के लोगों ने भूमि भी दान की थी। ग्रामीणों के अनुसार याकूब मोहम्मद ने 5 बीघा तथा जगदीश ने एक बीघा दस बिस्वा भूमि संस्थान के लिए दान स्वरूप उपलब्ध करवाई थी।

छात्र संख्या में आई लगातार गिरावट

ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार कॉलेज में वर्ष 2017-18 में 59 विद्यार्थी, 2018-19 में 103, 2019-20 में 102, 2020-21 में 103 तथा 2021-22 में 113 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। वर्ष 2022-23 में भी छात्र संख्या 100 के आसपास रही।

हालांकि इसके बाद छात्र संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई और वर्ष 2024-25 में यह घटकर 49 तथा वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 में केवल 19 रह गई।

स्टाफ की कमी को बताया गिरावट का कारण

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2021 के बाद कॉलेज से धीरे-धीरे शिक्षकों और अन्य स्टाफ को हटाया गया, जिससे संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। उनका कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण छात्रों का रुझान कम हुआ और अब इसी आधार पर कॉलेज को बंद करने का निर्णय लिया गया है।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि समय पर पर्याप्त शिक्षक और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जातीं तो छात्र संख्या में गिरावट नहीं आती।

10 पंचायतों के लोगों ने जताया विरोध

भलेई पंचायत सहित आसपास की लगभग 10 पंचायतों के लोगों ने कॉलेज बंद करने के निर्णय का विरोध करते हुए सरकार से इसे पुनर्विचार करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह संस्थान क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख माध्यम रहा है और इसे बंद करने से आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो क्षेत्रवासी इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करने पर भी विचार कर सकते हैं।

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