दिल्ली में सुक्खू की बड़ी पैरवी: बैरा-स्यूल में 50% मुफ्त बिजली और 7,784 करोड़ रुपये ऊर्जा बकाया की उठाई मांग

मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से उठाए बिजली रॉयल्टी और ऊर्जा बकाया के मुद्दे
दिल्ली में सुक्खू की बड़ी पैरवी: बैरा-स्यूल में 50% मुफ्त बिजली और 7,784 करोड़ रुपये ऊर्जा बकाया की उठाई मांग

डलहौज़ी हलचल | शिमला/नई दिल्ली

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा तथा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली रॉयल्टी की हिस्सेदारी बढ़ाने का आग्रह किया।

बैरा-स्यूल परियोजना में 50 प्रतिशत मुफ्त बिजली की मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा संचालित उन परियोजनाओं में, जिनकी प्रारंभिक 12 वर्ष की अवधि पूरी हो चुकी है, सामान्य 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी के अतिरिक्त हिस्सेदारी बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने 180 मेगावाट की बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूरे होने के मद्देनजर परियोजना से मिलने वाली मुफ्त बिजली की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग रखी।

बीबीएमबी ऊर्जा बकाया का मुद्दा भी उठाया

मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं में राज्य को मिलने वाले ऊर्जा बकाया के भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान हिमाचल प्रदेश के हजारों लोगों ने विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभावों का सामना किया है।

उन्होंने आग्रह किया कि हरियाणा और पंजाब की सहमति से 31 अक्तूबर 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया तथा उसके बाद छह प्रतिशत ब्याज सहित राज्य को देय राशि का भुगतान किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि यह भुगतान धनराशि के रूप में किया जाता है तो वर्तमान गणना के अनुसार यह राशि लगभग 7,784 करोड़ रुपये बनती है।

शानन परियोजना पर रखा हिमाचल का पक्ष

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शानन जलविद्युत परियोजना की पृष्ठभूमि से भी केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया और परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के वैध अधिकार का पक्ष मजबूती से रखा।

कांगड़ा की एयरो सिटी और हिम चंडीगढ़ के लिए मांगी सहायता

मुख्यमंत्री ने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ और ‘हिम चंडीगढ़’ परियोजनाओं के विकास के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में सुनियोजित शहरीकरण, निवेश, पर्यटन और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

शहरी विकास योजनाओं के लिए भी रखा प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 24 शहरी स्थानीय निकायों में अर्बन चैलेंज फंड के तहत 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं, जिनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रथम चरण में भारत सरकार को भेजी जा चुकी हैं।

उन्होंने ‘क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज इनिशिएटिव’ के अंतर्गत स्वच्छता और कचरा प्रबंधन कार्यों के लिए 12.33 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध भी किया। इसके अलावा अमृत योजना के तहत शेष 64.45 करोड़ रुपये जारी करने तथा अमृत मित्रा योजना के अंतर्गत 14 शहरी निकायों की 43 परियोजनाओं को स्वीकृति देने का आग्रह भी किया।

डिजिटल डोर प्लेट परियोजना के लिए मांगी वित्तीय सहायता

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों में प्रत्येक संपत्ति को विशिष्ट पहचान देने के लिए क्यूआर आधारित डिजिटल डोर प्लेट प्रणाली लागू की जा रही है। उन्होंने इस परियोजना के दूसरे चरण के सफल क्रियान्वयन के लिए आगामी पांच वर्षों में 18 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया।

बैठक में मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह तथा ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित रहे।

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