मां के नाम रहा खास दिन! कुफरी में बच्चों और माताओं ने साझा किए भावुक पल

डलहौज़ी हलचल (शिमला): मां और बच्चे के अटूट रिश्ते को समर्पित मदर्स डे के अवसर पर शेमरॉक रोजेज प्ले स्कूल, कच्चीघाटी द्वारा ‘हिप हिप हुरले’ कुफरी में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस खास अवसर पर नन्हे बच्चों और उनकी माताओं ने प्यार, अपनत्व और खुशी से भरे कई यादगार पल साझा किए। […]
मां के नाम रहा खास दिन! कुफरी में बच्चों और माताओं ने साझा किए भावुक पल

डलहौज़ी हलचल (शिमला): मां और बच्चे के अटूट रिश्ते को समर्पित मदर्स डे के अवसर पर शेमरॉक रोजेज प्ले स्कूल, कच्चीघाटी द्वारा ‘हिप हिप हुरले’ कुफरी में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस खास अवसर पर नन्हे बच्चों और उनकी माताओं ने प्यार, अपनत्व और खुशी से भरे कई यादगार पल साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान पूरा माहौल भावनाओं, उत्साह और मुस्कुराहटों से सराबोर नजर आया। बच्चों की मासूम प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया।

बच्चों ने उपहार देकर जताया प्यार

मदर्स डे समारोह के दौरान बच्चों ने अपनी माताओं को सुंदर उपहार भेंट कर उन्हें विशेष होने का अहसास कराया। माताओं के चेहरों पर खिली मुस्कान और बच्चों का उत्साह कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।

इस अवसर पर आयोजित गतिविधियों ने मां-बच्चे के रिश्ते की मिठास और भावनात्मक जुड़ाव को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।

मां का रिश्ता सबसे अनमोल: प्रीति चुट्टानी

स्कूल की प्रधानाचार्य प्रीति चुट्टानी ने कहा कि मां और बच्चे का रिश्ता दुनिया का सबसे निस्वार्थ और समर्पित रिश्ता होता है।

उन्होंने कहा, “मां अपने बच्चों की खुशी और बेहतर भविष्य के लिए हर कठिनाई का हंसते हुए सामना करती है। वैसे तो मां के लिए हर दिन खास होता है, लेकिन मदर्स डे बच्चों को अपनी माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर देता है।”

मदर्स डे के इतिहास की भी दी जानकारी

प्रधानाचार्य ने मदर्स डे के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी जड़ें प्राचीन यूनान और रोम की सभ्यताओं से जुड़ी हुई हैं।

उन्होंने बताया कि आधुनिक मदर्स डे की शुरुआत 1900 के दशक में अन्ना जार्विस के प्रयासों से हुई थी। अन्ना जार्विस ने अपनी मां की स्मृति में वर्ष 1908 में पहला आधिकारिक समारोह आयोजित किया था, जिसे बाद में वर्ष 1914 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया।

रिश्तों की मिठास से सराबोर रहा आयोजन

कुफरी के मनोरम वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल बच्चों और माताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ा, बल्कि समाज में मां के महत्व और रिश्तों की मिठास को भी खूबसूरती से उजागर किया।

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